हाथरस में हरियाली पर ‘कुल्हाड़ी राज’! TTZ नियमों की उड़ रही धज्जियां
पर्यावरण संरक्षण के दावे फेल, हाथरस में खुलेआम कट रहे हरे पेड़; विभागीय मिलीभगत के आरोप तेज
हाथरस। ताजमहल और पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाए गए TTZ (ताज ट्रेपेजियम ज़ोन) नियमों की धज्जियां हाथरस में खुलेआम उड़ती नजर आ रही हैं। एक ओर सरकार हरियाली बचाने और वृक्षारोपण अभियान चलाने के बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद में हरे-भरे पेड़ों पर धड़ल्ले से कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर के आसपास तक बड़े पैमाने पर अवैध कटान की चर्चाएं आम हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार जिले में बागों के ठेके लेकर रातों-रात पेड़ों की कटाई कराई जा रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों में भरकर लकड़ी खुलेआम सड़कों से गुजर रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नजरें इन वाहनों तक नहीं पहुंच रहीं। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर बिना विभागीय संरक्षण के इतना बड़ा खेल कैसे संभव हो सकता है?
TTZ नियमों के बावजूद नहीं रुक रहा कटान
गौरतलब है कि हाथरस TTZ यानी ताज ट्रेपेजियम ज़ोन क्षेत्र में आता है। यह वही संरक्षित क्षेत्र है जिसे ताजमहल और आसपास के पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाया गया था। TTZ नियमों के तहत पेड़ों की कटाई, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों पर सख्त निगरानी का प्रावधान है।
नियमों के अनुसार कई प्रजातियों के पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य होता है। विशेष रूप से नीम, पीपल और बरगद जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों की कटाई पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाती है। इसके बावजूद हाथरस में नीम जैसे प्रतिबंधित वृक्षों के कटान की खबरों ने पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है।
“छोटों पर सख्ती, बड़े खेल पर चुप्पी”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पर्यावरण संरक्षण और TTZ नियमों के नाम पर छोटे कारोबारियों और आम नागरिकों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारी अवैध कटान के मामलों में पूरी तरह मौन दिखाई दे रहे हैं। शिकायतें करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती और कई मामलों में फाइलें दबाकर मामला शांत कर दिया जाता है।
यही वजह है कि अब विभागीय मिलीभगत की चर्चाएं भी तेजी से फैल रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि रोजाना भारी मात्रा में लकड़ी सड़कों से गुजर रही है तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी न होना संभव नहीं है।
पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार पेड़ों की कटाई से न केवल हरियाली खत्म होगी बल्कि तापमान बढ़ने, प्रदूषण बढ़ने और भूजल स्तर गिरने जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। TTZ क्षेत्र में हरियाली का संरक्षण बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील है।
कुछ समय पूर्व एक पर्यावरणविद द्वारा अवैध कटान के खिलाफ आंदोलन चलाया गया था, जिसके बाद कुछ समय तक कटान पर रोक लगी थी। लेकिन अब फिर से पेड़ों की कटाई का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध कटान में शामिल लोगों और संरक्षण देने वाले अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही TTZ नियमों का सख्ती से पालन कराने, अवैध लकड़ी परिवहन रोकने और विशेष अभियान चलाने की भी मांग उठ रही है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हाथरस की हरियाली केवल सरकारी रिकॉर्ड और फोटो तक सीमित रह जाएगी।
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