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जहरीला भूजल बना किसानों की जंग का कारण: अमरोहा में मंत्री के सामने फूटा आक्रोश

जहरीला भूजल बना किसानों की जंग का कारण: अमरोहा में मंत्री के सामने फूटा आक्रोश, 43 दिन से जारी बेमियादी धरना

डिजिटल न्यूज पोर्टल | एम पी सिंह की विशेष रिपोर्ट

अमरोहा, 01 फरवरी।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का नाईपुरा गांव इन दिनों जहरीले भूजल की भयावह त्रासदी से जूझ रहा है। रासायनिक कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट ने गांव के हैंडपंप और ट्यूबवेल को मौत का कुआं बना दिया है। इसी गंभीर संकट को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों और मंचों पर दिखने लगा है।

शनिवार को मुकारी गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने प्रभारी मंत्री एवं वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री केपी मलिक के समक्ष इस मुद्दे को बेहद धारदार तरीके से उठाया।

जहरीले पानी की बोतलें, व्यवस्था पर तीखा सवाल

31 जनवरी को ग्राम चौपाल के दौरान नरेश चौधरी ने जहरीले पानी की बोतलें मंत्री को दिखाते हुए नाईपुरा गांव की हकीकत बयां की। उन्होंने कहा कि रासायनिक कारखानों के प्रदूषण से भूजल पूरी तरह दूषित हो चुका है। ग्रामीण गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं और पशुधन तक सुरक्षित नहीं रहा।

किसान नेता ने सीधे तौर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना, इस त्रासदी को और विकराल बना रहा है।

मंत्री का आश्वासन, लेकिन सवाल बरकरार

प्रभारी मंत्री केपी मलिक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूछा कि भूजल दूषित करने में कौन-कौन से रासायनिक कारखाने शामिल हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होते ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

हालांकि किसानों का कहना है कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा। वे स्थायी समाधान और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

43 दिनों से जारी बेमियादी धरना, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

यह पूरा घटनाक्रम शहबाजपुर डोर में चल रहे 43 दिनों से अधिक के बेमियादी धरने की पृष्ठभूमि में सामने आया है। किसान प्रदूषण के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए हैं। नरेश चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर गरमाई राजनीति

इस मुद्दे ने अमरोहा में राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। प्रशासन जहां जांच जारी होने की बात कह रहा है, वहीं किसान इसे नाकाफी मानते हुए ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

किसानों की बड़ी मौजूदगी

इस मौके पर राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडल अध्यक्ष एहसान अली, होमपाल सिंह, विजय सिंह, भूखन सिंह, रतिराम सिंह, ओम प्रकाश सिंह, राम प्रकाश सिंह समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

नाईपुरा गांव का जहरीला भूजल अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकारी आश्वासन जमीनी कार्रवाई में बदलते हैं या किसानों का आंदोलन और तेज होता है।

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