खनन माफिया या प्रशासनिक चूक? डंपर–ट्रैक्टर हादसे ने छीनी एक ज़िंदगी, जांच के घेरे में खनन व्यवस्था
नजीबाबाद–कोटद्वार मार्ग पर मौत का सच तलाशेगी तीन सदस्यीय समिति, जिलाधिकारी के निर्देश पर कार्रवाई शुरू
बिजनौर | 30 दिसंबर 2025
नजीबाबाद–कोटद्वार मार्ग पर ग्राम जसवंतपुर उर्फ लुकादड़ी के सामने हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर जिले में खनन परिवहन की सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खनन सामग्री से भरे डंपर और ट्रैक्टर की आमने-सामने की टक्कर में ट्रैक्टर चालक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया है।
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर के निर्देशों के अनुपालन में इस प्रकरण की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है।
कौन करेगा जांच?
गठित समिति में शामिल हैं—
- उप जिलाधिकारी (एसडीएम) नजीबाबाद
- क्षेत्राधिकारी (सीओ) पुलिस नजीबाबाद
- खान निरीक्षक
यह समिति हादसे के कारणों, जिम्मेदारियों और नियमों के उल्लंघन की पड़ताल करेगी।
हादसा या लापरवाही?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह मार्ग पहले से ही तेज़ रफ्तार खनन डंपरों के कारण हादसों का गढ़ बन चुका है।
- क्या डंपर ओवरलोड था?
- क्या चालक के पास वैध परमिट था?
- क्या वाहन की गति और संचालन खनन परिवहन नियमों के अनुरूप था?
- क्या पुलिस व खनन विभाग की नियमित चेकिंग प्रभावी थी?
इन सभी बिंदुओं पर अब जांच समिति की रिपोर्ट निर्णायक मानी जाएगी।
प्रशासन की साख दांव पर
यह कोई पहला मामला नहीं है जब खनन वाहनों की टक्कर से निर्दोष लोगों की जान गई हो। जिले में बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि
या तो नियम काग़ज़ों तक सीमित हैं, या फिर उनका पालन कराने की इच्छाशक्ति कमजोर है।
अब देखना यह है कि यह समिति केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या फिर
दोषियों तक कार्रवाई की आंच पहुंचती है।
परिजनों को न्याय की आस
हादसे में जान गंवाने वाले ट्रैक्टर चालक के परिजन प्रशासन से
- निष्पक्ष जांच
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई
- और उचित मुआवज़े
की मांग कर रहे हैं।
संपादकीय टिप्पणी
खनन से जुड़े हादसे अब “दुर्घटना” नहीं, बल्कि प्रणालीगत विफलता का प्रतीक बनते जा रहे हैं। यदि जांच के बाद भी
- लाइसेंस रद्द न हों,
- वाहन जब्त न हों,
- और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई न हो—
तो ऐसी समितियां केवल फाइलों की शोभा बनकर रह जाएंगी।अब निगाहें टिकी हैं तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर, जो यह तय करेगी कि यह मामला न्याय की ओर जाएगा या फिर एक और मौत आंकड़ों में दबा दी जाएगी।












