Target Tv Live

बिजनौर में अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर से पहले वैध कॉलोनियों की जांच जरूरी, पंचायत के फैसले पर उठे बड़े सवाल

बिजनौर।
बिजनौर में अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी के बीच जिला पंचायत के फैसले ने प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ सिस्टम की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह नहीं है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई हो या नहीं, बल्कि यह है कि जिन कॉलोनियों को अब तक वैध घोषित किया गया है, क्या वे वास्तव में नियमों और मानकों पर खरी उतरती हैं।

जिला पंचायत बोर्ड बैठक में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव पारित किया गया, लेकिन इसी बैठक में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पहले से स्वीकृत कॉलोनियों का कोई भौतिक सत्यापन कराया गया है या नहीं।

वैध कॉलोनियों की जांच क्यों जरूरी

शहरी नियोजन और ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई कॉलोनियां केवल कागजों में वैध हैं, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। कई स्थानों पर न तो निर्धारित चौड़ाई की सड़कें हैं और न ही जल निकासी और ड्रेनेज की प्रभावी व्यवस्था।

इसके अलावा, हरित पट्टी, पार्क और सामुदायिक स्थल कई कॉलोनियों में नक्शों तक ही सीमित बताए जा रहे हैं। ऐसे में बिना वैध कॉलोनियों की समीक्षा किए केवल अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई को चयनात्मक न्याय माना जा रहा है।

2026-27 की योजनाएं और सवाल

बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कई विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें वर्षा जल संचयन, जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई शुल्क लागू करने और रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि क्या पहले से स्वीकृत कॉलोनियों में इन व्यवस्थाओं की स्थिति की कोई समीक्षा की गई है, या विकास योजनाएं सिर्फ नई फाइलों तक सीमित रह जाएंगी।

अधिकारियों की गैरहाजिरी पर नाराजगी

बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति ने प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए। जिला पंचायत अध्यक्ष ने इस पर नाराजगी जताई, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि कॉलोनी स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की कोई जांच होगी या नहीं।

किसान पर सख्ती, कॉलोनाइजर को राहत

बैठक में यह आरोप भी सामने आया कि जहां आम किसान को पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिलती, वहीं कॉलोनाइजरों को नियमों से इतर छूट मिल जाती है। इसे सिस्टम की दोहरी कार्यशैली का उदाहरण बताया जा रहा है।

पारदर्शिता ही समाधान

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई से पहले सभी वैध कॉलोनियों का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन, मानकों की सार्वजनिक रिपोर्ट और दोषी अधिकारियों व कॉलोनाइजरों पर समान कार्रवाई जरूरी है।

जब तक वैध कॉलोनियों की सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक बिजनौर में बुलडोजर की कार्रवाई से ज्यादा सवाल खड़े होते रहेंगे।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें