अब चुप्पी नहीं, निर्णायक हस्तक्षेप चाहिए
बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों के खिलाफ सड़कों से प्रशासन तक गूंजा आक्रोश
बिजनौर।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों को लेकर देश के भीतर बेचैनी अब खुलकर सामने आने लगी है। विश्व हिन्दू महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अमर सिंह गंगवार के आह्वान पर बिजनौर में जिलाध्यक्ष रूपेश के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन अपर उप-जिला मजिस्ट्रेट को सौंपकर साफ संदेश दिया—
“अब सिर्फ चिंता नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।”
‘हिन्दू होना क्या अपराध है?’—ज्ञापन में तीखे सवाल
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हिन्दुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है, मंदिरों को क्षति पहुंचाई जा रही है और धार्मिक स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक देश की आंतरिक समस्या नहीं, बल्कि मानवाधिकारों पर सीधा हमला है।
‘भारत की खामोशी अब विकल्प नहीं’
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि भारत सरकार इस मुद्दे को
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाए,
- बांग्लादेश पर कूटनीतिक दबाव बनाए,
- और वहां रहने वाले हिन्दुओं की सुरक्षा की अंतरराष्ट्रीय गारंटी सुनिश्चित कराने की दिशा में पहल करे।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के नाते भारत की भूमिका सिर्फ दर्शक की नहीं हो सकती।
जनभावना उबाल पर, चेतावनी भी स्पष्ट
ज्ञापन में यह भी दर्ज कराया गया कि यदि अत्याचारों पर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जनआक्रोश और अधिक गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
संगठन ने कहा कि हिन्दू समाज घटनाक्रम को बारीकी से देख रहा है और अब प्रतीक्षा की भी एक सीमा है।
अतिरिक्त उप-जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से पीएम तक आवाज
कार्यकर्ताओं ने अपर उप-जिला मजिस्ट्रेट से आग्रह किया कि ज्ञापन को तत्काल प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजा जाए। प्रशासन की ओर से ज्ञापन प्राप्त कर उचित माध्यम से अग्रेषण का आश्वासन दिया गया।
बन रहा है यह मुद्दा ज्वलंत?
विश्लेषकों के अनुसार, यह विरोध केवल एक संगठन की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस सामूहिक असंतोष की अभिव्यक्ति है जो धार्मिक उत्पीड़न के मामलों में भारत की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
बिजनौर से उठी यह आवाज़ बताती है कि अब यह विषय
👉 सिर्फ विदेश नीति नहीं,
👉 बल्कि घरेलू जनभावना का भी प्रश्न बन चुका है।
निष्कर्ष | एक ज्ञापन, कई संकेत
प्रदेश अध्यक्ष अमर सिंह गंगवार के आह्वान पर हुआ यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार अब खामोशी से सहने का विषय नहीं रहे।
अब निगाहें केंद्र सरकार के रुख पर हैं—
क्या यह आवाज़ सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी, या नीति में बदलेगी?












