शीतलहर का अलर्ट! यूपी में कड़ाके की ठंड ने थमाई स्कूलों की रफ्तार
कोहरे–ठंड के कहर के बीच सरकार का बड़ा फैसला: कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूल 3 दिन बंद
लखनऊ | विशेष रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में सर्दी ने इस बार समय से पहले ही अपना तीखा तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार गिरते तापमान, घने कोहरे और मौसम विभाग के सख्त पूर्वानुमान के बीच राज्य सरकार ने छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है।
शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रताप सिंह बघेल द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश में संचालित परिषदीय, मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त, राजकीय और सभी बोर्डों से संबद्ध कक्षा 1 से 12 तक के विद्यालयों में 29 दिसंबर 2025 से 01 जनवरी 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है।
कोहरे की चादर, ठिठुरता प्रदेश
पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल तक घना कोहरा जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। सुबह के समय दृश्यता कई स्थानों पर 20–30 मीटर तक सिमट गई है। सड़कों पर वाहन रेंग रहे हैं और खुले वातावरण में निकलना जोखिम भरा हो गया है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 72 घंटे शीतलहर और कोहरे के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील हैं। इसी चेतावनी को आधार बनाकर शिक्षा विभाग ने एहतियाती कदम उठाया।
किस-किस पर लागू होगा अवकाश? जानिए पूरी तस्वीर
यह आदेश केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है।
➡️ परिषदीय विद्यालय
➡️ सहायता प्राप्त संस्थान
➡️ मान्यता प्राप्त निजी स्कूल
➡️ राजकीय विद्यालय
➡️ सीबीएसई, आईसीएसई सहित अन्य बोर्ड
सभी पर समान रूप से लागू होगा।
यानी कक्षा 1 से 12 तक का कोई भी छात्र इस अवकाश से अछूता नहीं रहेगा।
स्वास्थ्य बनाम पढ़ाई: सरकार ने क्यों चुना अवकाश का रास्ता?
ठंड और कोहरे का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। सांस संबंधी समस्याएं, सर्दी-जुकाम, निमोनिया और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि अवकाश नहीं दिया जाता तो यह निर्णय भविष्य में प्रशासन के लिए संकट खड़ा कर सकता था। इसलिए “पहले सुरक्षा” के सिद्धांत को अपनाते हुए यह फैसला लिया गया।
सख्त निर्देश: आदेश का कड़ाई से पालन अनिवार्य
शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलाधिकारियों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और मंडलीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आदेश का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि कुछ निजी स्कूलों द्वारा आदेश को हल्के में लेने की प्रवृत्ति को देखते हुए इस बार प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
क्या यह फैसला समय पर लिया गया?
विशेषज्ञों की मानें तो यह फैसला देरी से नहीं, बल्कि बिल्कुल सही समय पर आया है।
पिछले वर्षों में ठंड के कारण स्कूल आते-जाते बच्चों के साथ दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आई थीं। इस बार सरकार ने पहले से खतरे को भांपते हुए कदम उठाया, जो सराहनीय है।
अभिभावकों और छात्रों के लिए क्या है संदेश?
✔️ बच्चों को सुबह-शाम ठंड से बचाएं
✔️ अनावश्यक बाहर न निकलने दें
✔️ स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखें तो सतर्क रहें
✔️ अवकाश को सुरक्षित और सकारात्मक गतिविधियों में उपयोग करें
ठंड के आगे झुकी पढ़ाई, लेकिन जीती सुरक्षा
तीन दिन का यह अवकाश केवल छुट्टी नहीं, बल्कि राज्य सरकार की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जब हालात सामान्य होंगे, पढ़ाई फिर रफ्तार पकड़ेगी — लेकिन फिलहाल प्राथमिकता है बच्चों की सुरक्षा।











