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12 साल की लेखनी ने रचा इतिहास: ‘रामानुज साहित्यिक सम्मान–2025’ से सम्मानित हुईं वरेण्या कृष्णा सरोहा

12 साल की लेखनी ने रचा इतिहास: ‘रामानुज साहित्यिक सम्मान–2025’ से सम्मानित हुईं वरेण्या कृष्णा सरोहा

 

 

देवनगरी हरिद्वार में साहित्य का महाकुंभ, ‘आधी रात का चांद’ नाटक बना चर्चा का केंद्र

बिजनौर | अवनीश त्यागी, डिजिटल न्यूज डेस्क
देवनगरी हरिद्वार में आयोजित “रामानुज साहित्यिक सम्मान समारोह–2025” उस समय ऐतिहासिक बन गया, जब साहित्य जगत की निगाहें टिक गईं एक 12 वर्षीय बाल साहित्यकार पर। वैदिक पब्लिकेशन के मंच से वरेण्या कृष्णा सरोहा को उनके सशक्त नाटक “आधी रात का चांद” के लिए रामानुज साहित्यिक सम्मान–2025 से अलंकृत किया गया।
कम उम्र, लेकिन विचारों में गहराई—इस बाल रचनाकार ने यह साबित कर दिया कि लेखनी की कोई उम्र नहीं होती।

‘आधी रात का चांद’: रिश्तों के अंधेरे में उम्मीद की रोशनी

वरेण्या का नाटक “आधी रात का चांद” एक ऐसे परिवार की कहानी कहता है, जहां संवादों की कमी रिश्तों को टकराव की ओर ले जाती है। नाटक में भावनात्मक द्वंद्व, मौन की पीड़ा और संबंधों की नाजुकता को अत्यंत संवेदनशीलता से उकेरा गया है।

वरेण्या का कहना है:
“यह नाटक उन पारिवारिक संघर्षों पर आधारित है, जिन्हें हम रोज़ जीते हैं, लेकिन अक्सर कह नहीं पाते।”

बाल उम्र में बड़ी उपलब्धि: आंकड़ों में वरेण्या की उड़ान

  • 35 से अधिक रचनाएं – कविता, कहानी, लेख और नाटक
  •  चर्चित नाटक – आधी रात का चांद
  •  विषय – परिवार, संवेदना, मानवीय रिश्ते
  •  उम्र – सिर्फ 12 साल, सोच में परिपक्वता अद्भुत

हरिद्वार बना साहित्य की राजधानी

सम्मान समारोह में देश के कोने-कोने से कवि, लेखक, रचनाकार और साहित्यप्रेमी जुटे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारतीय साहित्य की जड़ें मजबूत हैं और भविष्य उज्ज्वल।

मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट उपस्थिति

  • अजीत आर्य

  • डॉ. अरुण कुमार शास्त्री

  • समन्वयक – नीतू कुमारी

  • वरिष्ठ सलाहकार – अंजली सारस्वत

वैदिक पब्लिकेशन ने बढ़ाया साहित्य का मान

वैदिक पब्लिकेशन की प्रकाशक प्रशस्ति सचदेव ने वरेण्या की रचना की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा—

“वरेण्या जैसी प्रतिभाएं यह साबित करती हैं कि साहित्य का भविष्य सुरक्षित और सशक्त हाथों में है।”

अन्य प्रमुख उपस्थित लोग

  • गौरव शर्मा (प्रबंधक)

  • राधा मिश्र शर्मा (सह-प्रकाशक)

  • अरुण राठौर

  • दीपक सरोहा

  • अनु

  • अद्वैत नारायण सरोहा

सशक्त संचालन, जीवंत मंच

कार्यक्रम का संचालन अभिषेक मिश्रा ‘अभिव्यक्ति’, कवयित्री हिना कौशर एवं कवि सुनील सैनी ने संयुक्त रूप से किया। मंच संचालन ने समारोह को गंभीर, गरिमामय और भावनात्मक बना दिया।

विश्लेषण: यह सम्मान क्यों है खास?

  • 🔹 बाल साहित्य को मिला राष्ट्रीय स्तर का मंच
  • 🔹 नई पीढ़ी की रचनात्मक सोच को पहचान
  • 🔹 साहित्य में उम्र नहीं, दृष्टि और संवेदना निर्णायक
  • 🔹 डिजिटल दौर में भी गंभीर साहित्य की बढ़ती स्वीकार्यता

निष्कर्ष | छोटी उम्र, बड़ा साहित्यिक संदेश

रामानुज साहित्यिक सम्मान–2025 केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि यह संकेत है कि भारतीय साहित्य की मशाल अब नई पीढ़ी के हाथों में है। वरेण्या कृष्णा सरोहा जैसी बाल लेखिकाएं आने वाले समय में साहित्य की दिशा तय करेंगी।

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