कोर्ट ले जा रही पुलिस गाड़ी के आगे लेटे भाकियू कार्यकर्ता
जानलेवा हमले के आरोपी को छुड़ाने की कोशिश, किसान संगठन बनाम कानून—किरतपुर में टकराव
बिजनौर | डिजिटल डेस्क
किरतपुर में मंगलवार को कानून-व्यवस्था उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब जानलेवा हमले के आरोपी को कोर्ट ले जा रही पुलिस की गाड़ी के आगे भाकियू टिकैत गुट के कार्यकर्ता लेट गए। आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश ने हालात को तनावपूर्ण बना दिया। खींचतान, धक्का-मुक्की और झड़प के बीच पुलिस किसी तरह आरोपी को कोर्ट तक ले जाने में सफल रही, लेकिन इसके बाद थाने में धरना शुरू हो गया।
पुलिस गाड़ी रोकी, आरोपी को खींचने की कोशिश
मंगलवार सुबह किरतपुर थाना परिसर से पुलिस जब आरोपी कुलदीप को कोर्ट में पेश करने के लिए रवाना हुई, तभी पहले से मौजूद भाकियू टिकैत गुट के कार्यकर्ताओं—रजनीश अहलावत समेत—ने गाड़ी रोक ली। कार्यकर्ताओं ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए जेल भेजने का विरोध शुरू कर दिया।
विरोध बढ़ा तो आरोपी को गाड़ी से खींचने का प्रयास किया गया। पुलिस ने समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। हालात बिगड़ते देख कुछ कार्यकर्ता गाड़ी के आगे लेट गए, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हो गई।
पुलिस का सख्त रुख, दो कार्यकर्ता हिरासत में
कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने आरोपी को लेकर कोर्ट के लिए प्रस्थान किया। इस दौरान दो भाकियू कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में संगठन के पदाधिकारी थाने पहुंचे और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में विधिक कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
गांव शेखपुरा लाला निवासी राहुल की तहरीर पर दर्ज केस के अनुसार, वह अपने छोटे भाई मोहित के साथ बाइक से घर लौट रहा था। गांव ढाकी साधो से पहले कुलदीप, हरदीप, गीते (निवासी—इस्लामपुर सादात) और चार अज्ञात ने लाठी-डंडों से हमला किया।
हमले में मोहित के सिर में गहरी चोट आई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मामले को जानलेवा हमला मानते हुए पुलिस ने कार्रवाई की।
पुलिस और भाकियू—दोनों के बयान
थाना प्रभारी पुष्पा देवी ने बताया कि आरोपी को जबरन छुड़ाने का प्रयास कर सरकारी कार्य में बाधा डाली गई है। पूरे घटनाक्रम की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है।
भाकियू टिकैत गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष बाबू राम तोमर ने कहा, “किसानों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन के खिलाफ गलत भाषा और कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।”
सीओ का बयान: कानून अपना काम करेगा
सीओ नजीबाबाद नितेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया—
“जानलेवा हमले के आरोपी को जेल भेज दिया गया है। कोर्ट ले जाते समय कुछ लोगों ने गाड़ी के आगे लेटकर रोकने की कोशिश की। नियमानुसार सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
विश्लेषण: संगठन की राजनीति बनाम कानून का दायरा
यह घटना एक बार फिर संगठनात्मक दबाव और कानून के पालन के बीच टकराव को उजागर करती है। जहां एक ओर किसान संगठन उत्पीड़न का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का सवाल खड़ा हो रहा है।
क्या विरोध की आड़ में आरोपी को बचाने की कोशिश जायज़ है?
और क्या कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को और सख्ती दिखानी होगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई तय करेगी।
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