VB Gram-G बनाम मनरेगा: विकास की नई सोच या गरीबों के हक पर वार ?
ग्रामीण रोजगार को लेकर सियासत गरम, क्यों VB Gram-G पर भड़के विपक्षी दल?
विशेष रिपोर्ट |अवनीश त्यागी, डिजिटल न्यूज नेटवर्क
ग्रामीण भारत के भविष्य को लेकर एक बार फिर राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। सरकार जहां VB Gram-G (Village Business Gram-G) को गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मनरेगा को कमजोर करने की “सॉफ्ट साजिश” करार दे रहा है।
मुद्दा सीधा है—क्या VB Gram-G विकास का अगला चरण है या गरीबों से रोजगार का अधिकार छीना जा रहा है?
क्या है VB Gram-G? क्यों बना सियासी मुद्दा?
VB Gram-G का दावा है कि यह गांवों को मजदूरी पर निर्भरता से निकालकर उद्यमिता की ओर ले जाएगा।
खेती के साथ-साथ डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, लघु उद्योग, सेवा केंद्र और SHG आधारित कारोबार को बढ़ावा देकर गांव में ही स्थायी आय पैदा करने की बात की जा रही है।
लेकिन जैसे ही यह मॉडल जमीन पर उतरने लगा—
⚠️ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया।
मनरेगा बनाम VB Gram-G: असली अंतर क्या है?
🔹 मनरेगा: अधिकार आधारित मजदूरी
- 100 दिन का कानूनी रोजगार
- तात्कालिक मजदूरी भुगतान
- गरीब और असहाय के लिए सुरक्षा कवच
- संकट के समय जीवन रेखा
🔹 VB Gram-G: उद्यमिता आधारित मॉडल
- स्वरोजगार और व्यवसाय पर जोर
- दीर्घकालिक आय की संभावना
- कौशल, ऋण और बाजार पर निर्भरता
- “कमाओ, बढ़ाओ, रोजगार दो” की सोच
👉 एक पेट भरने की गारंटी, दूसरा भविष्य बनाने का दावा।
विपक्ष का आरोप: ‘मनरेगा को बैकडोर से खत्म करने की कोशिश’
विपक्षी दलों का कहना है—
“VB Gram-G के नाम पर सरकार मनरेगा के बजट और महत्व को धीरे-धीरे खत्म करना चाहती है।”
उनका तर्क है कि—
- हर गरीब उद्यमी नहीं बन सकता
- ऋण और बाजार का जोखिम गरीब पर थोपना गलत
- मनरेगा जैसी गारंटी का कोई विकल्प नहीं
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मनरेगा एक मजबूत वोट-बैंक योजना रही है, इसलिए उससे जुड़ा हर बदलाव सियासी तूफान खड़ा करता है।
सरकार का पलटवार: ‘मजदूरी नहीं, आत्मनिर्भरता चाहिए’
सरकारी पक्ष का कहना है—
“मनरेगा ने भूख से बचाया, VB Gram-G गरीबी से बाहर निकालेगा।”
सरकार का तर्क है कि—
- सिर्फ गड्ढा खोदने से गांव आगे नहीं बढ़ेगा
- स्थायी आय के बिना पलायन नहीं रुकेगा
- युवाओं को हाथ में औजार नहीं, कारोबार चाहिए
ग्राउंड रियलिटी: डर भी सही, उम्मीद भी
ग्रामीण विशेषज्ञ मानते हैं कि—
✔ मनरेगा गरीब के लिए जरूरी है
✔ VB Gram-G संभावनाओं से भरा है
लेकिन खतरा तब है जब—
❌ VB Gram-G के नाम पर मनरेगा को नजरअंदाज किया जाए
❌ बिना प्रशिक्षण और बाजार के लोगों को उद्यमी बना दिया जाए
क्या दोनों साथ चल सकते हैं?
विशेषज्ञों की राय लगभग एक-सी है—
“टकराव नहीं, तालमेल ही समाधान है।”
संभावित मॉडल—
- मनरेगा से बने संसाधनों का उपयोग VB Gram-G में
- मनरेगा मजदूरों को उद्यम प्रशिक्षण
- सुरक्षा + विकास = स्थायी समाधान
निष्कर्ष: योजना नहीं, नीयत पर है सवाल
असल लड़ाई मनरेगा बनाम VB Gram-G की नहीं,
बल्कि यह तय करने की है कि—
👉 गरीब सिर्फ मजदूर रहेगा या उद्यमी भी बनेगा?
अगर VB Gram-G को मनरेगा का विकल्प नहीं, अगला पड़ाव बनाया गया,
तो गांव सिर्फ काम मांगने वाला नहीं,
काम देने वाला बन सकता है।
📌 डिजिटल न्यूज पोर्टल के लिए तैयार यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण रोजगार की जंग अब सिर्फ योजनाओं की नहीं, सोच और राजनीति की हो चुकी है।












