एग्री-न्यूज | बिजनौर
बसंत बुवाई से पहले निर्णायक मंथन
बिंदल पेपर्स शुगर मिल में टिकाऊ गन्ना खेती पर हाई-लेवल संयुक्त कार्यशाला

Co-0238 पर पूरी तरह रोक, रेड रोट के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान
अवनीश त्यागी की विशेष, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट
बिजनौर | 23 दिसंबर 2025
आगामी बसंत कालीन गन्ना बुवाई 2026 को लेकर बिजनौर में गन्ना किसानों के भविष्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक आयोजन मंगलवार को सामने आया। बिंदल पेपर्स शुगर मिल, चांगीपुर के प्रांगण में आयोजित इस संयुक्त कार्यशाला ने साफ संकेत दे दिया कि अब गन्ना खेती पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, टिकाऊ और तकनीक-आधारित मॉडल पर चलेगी।
जिला गन्ना अधिकारी, बिजनौर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में बीज संकट, रेड रोट रोग, प्रजाति परिवर्तन, भूमि शोधन और यंत्रीकरण जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। यह कार्यशाला केवल समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि नीति, चेतावनी और कार्ययोजना—तीनों का संगम साबित हुई।
मंच पर मौजूद रहे नीति निर्धारक

इस उच्चस्तरीय कार्यशाला में चीनी मिल के वी.पी. जितेंद्र मलिक, मुख्य गन्ना प्रबंधक इंद्रवीर सिंह, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (चांदपुर), विशेष सचिव (नूरपुर) सहित समस्त गन्ना पर्यवेक्षक, फील्ड स्टाफ और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
👉 इसका सीधा संदेश था—निर्णय कागजों में नहीं, खेतों तक पहुंचेंगे।
कार्यशाला के केंद्र में रहे ये 5 बड़े मुद्दे
1. बीज उपलब्धता पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
कार्यशाला में सर्किलवार आधार प्राथमिक पौधशालाओं में उपलब्ध बीज की स्थिति का विस्तृत डेटा प्रेजेंटेशन किया गया।
जिला गन्ना अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“अब आंकड़ों में नहीं, जमीन पर बीज दिखना चाहिए।”
👉 सभी फील्ड स्टाफ को भौतिक सत्यापन अनिवार्य करने के निर्देश
👉 सीड ट्रैकिंग ऐप में गलत एंट्री पर सख्त कार्रवाई के संकेत
2. बीज आरक्षण बना ‘सुरक्षा कवच’
आगामी बुवाई सत्र में संभावित बीज संकट को देखते हुए बीज आरक्षण (Seed Reservation) को सबसे प्रभावी समाधान बताया गया।
👉 चीनी मिल को लक्ष्य के अनुरूप बुवाई सुनिश्चित करने के निर्देश
👉 बीज की कमी होने पर बाहरी स्रोतों से विभागीय दरों पर बीज उपलब्ध कराने का स्पष्ट आदेश
संकेत साफ:
अब बीज के नाम पर किसानों को भटकने नहीं दिया जाएगा।
3. रेड रोट के खिलाफ बड़ा फैसला: Co-0238 पूरी तरह बैन
कार्यशाला का सबसे कड़ा और अहम फैसला रहा—
❌ Co-0238 प्रजाति की बुवाई पर पूर्ण प्रतिबंध
रेड रोट (लाल सड़न रोग) के बढ़ते प्रकोप को गन्ना खेती के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह रोग अब सीधे उत्पादन और भुगतान दोनों पर असर डाल रहा है।
👉 किसानों को गोष्ठियों, पंपलेट्स, गांव-गांव प्रचार के जरिए जागरूक करने के निर्देश
👉 फील्ड स्टाफ को सख्त निगरानी के आदेश
स्पष्ट चेतावनी:
Co-0238 बोया तो नुकसान आपका—जिम्मेदारी आपकी!
4. भूमि और बीज शोधन अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता
विशेषज्ञों की वैज्ञानिक सलाह के आधार पर यह साफ किया गया कि रेड रोट का प्रभाव मिट्टी में लंबे समय तक बना रहता है।
👉 ट्राइकोडर्मा और थियोफैनेट मिथाइल के 100% प्रयोग पर जोर
👉 बिना भूमि शोधन के बुवाई को जोखिम भरा बताया गया
मैसेज क्लियर:
स्वस्थ मिट्टी = सुरक्षित फसल = बेहतर उत्पादन
5. यंत्रीकरण से बदलेगी गन्ना खेती की तस्वीर
श्रमिकों की कमी और लागत बढ़ने के बीच गन्ना खेती में मशीनीकरण को गेम चेंजर बताया गया।
👉 किसानों को ट्रेंच पद्धति अपनाने की सलाह
👉 चीनी मिल को अनुदान पर ट्रेंच मेकर, सबसॉइलर, ट्रैक्टर और स्प्रे मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश
👉 मिनी हार्वेस्टर को भविष्य की जरूरत करार
अधिकारियों का मानना:
“मशीनों के बिना अब खेती संभव नहीं।”
अंतिम लेकिन निर्णायक निर्देश
कार्यशाला के समापन पर जिला गन्ना अधिकारी ने निर्देश दिए कि—
👉 बीज धारक किसानों की सूची तुरंत गन्ना विकास परिषदों को उपलब्ध कराई जाए
👉 ताकि बसंत कालीन बुवाई समय पर, निर्बाध और लक्ष्य के अनुरूप पूरी हो सके।
निष्कर्ष:
यह कार्यशाला बिजनौर की गन्ना खेती के लिए टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है।
अब सवाल सिर्फ नीतियों का नहीं, बल्कि मैदानी क्रियान्वयन का है।
यदि निर्देशों का सख्ती से पालन हुआ, तो यह तय है कि—
बिजनौर की गन्ना खेती होगी
रोगमुक्त • आधुनिक • टिकाऊ • और अधिक लाभकारी










