बदलते मौसम में फसलों पर संकट!
गेहूं, सरसों और आलू के किसानों के लिए कृषि विभाग की बड़ी एडवाइजरी
तापमान के उतार-चढ़ाव से बढ़े रोग-कीट, समय पर प्रबंधन नहीं तो भारी नुकसान तय
📍 बिजनौर | अवनीश त्यागी कृषि विशेष रिपोर्ट
मौसम में अचानक हो रहे बदलाव अब किसानों की फसलों पर सीधा असर डालने लगे हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण गेहूं, सरसों और आलू की फसलों में रोग और कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी बिजनौर की ओर से एक विस्तृत कृषि परामर्श (एडवाइजरी) जारी की गई है, जिसमें वैज्ञानिक तरीकों से फसल सुरक्षा और उत्पादन बचाने पर जोर दिया गया है।
क्यों बढ़ रहा है फसलों पर खतरा?
मौसम की मार + लापरवाही = उत्पादन में गिरावट
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार—
- दिन-रात के तापमान में अंतर
- नमी की अधिकता
- असमय सिंचाई
- बिना उपचारित बीज का प्रयोग
इन कारणों से बीज जनित, भूमि जनित रोगों और कीटों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
गेहूं की फसल: दीमक से लेकर करनाल बंट तक अलर्ट
सही बीज शोधन ही पहला सुरक्षा कवच
एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि गेहूं की बुवाई से पहले—
- रोग-रोधी प्रजाति और प्रमाणित बीज का चयन अनिवार्य है
- बीज को कार्बेन्डाजिम या कार्बोक्सिन से उपचारित करना चाहिए
दीमक बनी बड़ी समस्या
विशेषज्ञों का कहना है कि—
- खेत की मिट्टी में मौजूद दीमक फसल को अंदर से खोखला कर देती है
- इसके लिए ब्यूवेरिया बेसियाना जैसे जैविक उपाय और आवश्यकता पड़ने पर क्लोरपाइरीफॉस का नियंत्रित प्रयोग कारगर है
खरपतवार: चुपचाप उत्पादन निगलने वाला दुश्मन
गेहूंसा और जंगली जई पर विशेष नजर
रिपोर्ट के मुताबिक खरपतवार यदि शुरुआती 25 दिनों में नियंत्रित न किए जाएं तो—
- उपज में 20–30% तक की गिरावट संभव है
इसीलिए कृषि विभाग ने सल्फोसल्फ्यूरान, क्लोडिनाफॉप और मेटसल्फ्यूरान जैसे अनुशंसित रसायनों के संतुलित उपयोग की सलाह दी है।
सरसों और राई: रोग दिखे तो देर न करें
आरा मक्खी और पत्ती सुरंगक का बढ़ता प्रकोप
सरसों की फसल में—
- सफेद गेरूआ और तुलासिता रोग
- आरा मक्खी व पत्ती सुरंगक कीट
तेजी से नुकसान पहुंचा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बीज शोधन और समय पर डाइमिथोएट या क्विनालफॉस का छिड़काव फसल को बचा सकता है।
आलू की फसल: ब्लैक स्कर्फ बना सिरदर्द
बीज शोधन नहीं किया तो घाटा तय
आलू उत्पादक किसानों के लिए चेतावनी देते हुए बताया गया है कि—
- ब्लैक स्कर्फ रोग बीज के माध्यम से फैलता है
- बिना उपचारित बीज लगाने से पूरी फसल प्रभावित हो सकती है
इसके लिए पेनफ्लूफेन या थायफ्लूजामाइड से बीज शोधन को अनिवार्य बताया गया है।
विश्लेषण: क्यों जरूरी है यह एडवाइजरी?
खेत से बाजार तक असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि—
- यह एडवाइजरी केवल तकनीकी सलाह नहीं
- बल्कि खाद्य सुरक्षा, किसान आय और बाजार स्थिरता से जुड़ा अहम कदम है
यदि किसान समय रहते इन उपायों को अपनाते हैं तो— ✔ उत्पादन सुरक्षित रहेगा
✔ लागत नियंत्रित होगी
✔ अनावश्यक रासायनिक छिड़काव से बचाव होगा
कृषि विभाग की अपील
“किसान भाई वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही बीज शोधन, छिड़काव और खरपतवार नियंत्रण करें। अनावश्यक या अधिक रसायन नुकसानदेह हो सकता है।”
— जिला कृषि रक्षा अधिकारी, जसवीर सिंह,बिजनौर
सावधानी ही सुरक्षा है
बदलते मौसम के इस दौर में खेती अब केवल परंपरा नहीं, वैज्ञानिक समझ और समयबद्ध निर्णय का खेल बन चुकी है। कृषि विभाग की यह एडवाइजरी यदि जमीन पर उतरी, तो न केवल फसल बचेगी बल्कि किसान की मेहनत और आमदनी भी सुरक्षित रहेगी।












