“बिजनौर की बेटियाँ चमकीं एशिया में — जिलाधिकारी ने दी ₹75,000 की प्रोत्साहन राशि, कहा – ‘स्वर्ण लाओ, जनपद गर्व से झूमेगा’”
एशियन रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर बिजनौर की तीन बेटियों ने लिखा इतिहास — डीएम बोलीं, ‘खेल प्रतिभा ही असली पहचान है’
बिजनौर, 27 अक्टूबर 2025 | विशेष रिपोर्ट – अवनीश त्यागी
खेल के मैदान पर जब देश का तिरंगा ऊँचा लहराता है, तो सिर्फ राष्ट्र ही नहीं, बल्कि हर जिले का गौरव भी बढ़ता है।
बिजनौर की तीन नन्हीं शेरनियाँ — वैष्णवी शर्मा, श्रेया और आकृति सोरियान — ने ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है।
इन तीनों बालिकाओं ने 20वीं एशियन रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप 2025 में रोलर डर्बी स्पर्धा में भाग लेकर भारत को रजत पदक (Silver Medal) दिलाया।
इनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय में इन खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए ₹75,000 की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की।
“मेहनत का सम्मान” — हर खिलाड़ी को मिला ₹25,000
- जिला खेल विकास प्रोत्साहन समिति, बिजनौर द्वारा
प्रत्येक खिलाड़ी को ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। - कुल ₹75,000 (पचहत्तर हजार रुपये) की सहायता दी गई।
- इससे पहले भी प्रतियोगिता में भाग लेने से पूर्व इन्हीं तीनों खिलाड़ियों को समान सहायता दी गई थी।
डीएम जसजीत कौर ने कहा — “बिजनौर की बेटियाँ ही असली ब्रांड एंबेसडर हैं”
जिलाधिकारी ने इस अवसर पर बेटियों को बधाई देते हुए कहा,
“कुमारी वैष्णवी, श्रेया और आकृति ने साबित किया है कि प्रतिभा लिंग पर निर्भर नहीं होती, अवसर और मेहनत मिल जाए तो हर बेटी सोना बन जाती है।
जिला प्रशासन खेलों के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
हम चाहते हैं कि आने वाले समय में ये बेटियाँ स्वर्ण पदक लेकर आएँ और भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन करें।”
डीएम ने आगे कहा कि
“खेल सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाते हैं।
जो युवा खेलों से जुड़ते हैं, वे समाज के लिए भी प्रेरणा बनते हैं।”
राजकुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी बोले — ‘यह केवल पुरस्कार नहीं, प्रेरणा है’
“जिला प्रशासन का यह कदम खिलाड़ियों में आत्मविश्वास जगाने वाला है।
वैष्णवी, श्रेया और आकृति ने जो हासिल किया है, वह बिजनौर के हर घर के लिए गर्व की बात है।
यह सहायता सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि आने वाले समय की नई प्रेरणा है।”
बिजनौर की बेटियाँ — संघर्ष से सफलता तक की कहानी
इन तीनों खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों में कड़ी मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया।
सुबह-शाम घंटों की प्रैक्टिस, कठिन प्रशिक्षण और न झुकने वाले हौसले ने इन्हें इस ऊँचाई तक पहुँचाया।
परिवारों ने भी अपनी बेटियों को खुलकर समर्थन दिया — क्योंकि उन्होंने देखा कि सपनों की राह आसान नहीं, पर असंभव भी नहीं।
वैष्णवी शर्मा ने कहा: “यह सम्मान हमारे लिए नई ऊर्जा है। अगली बार हम गोल्ड लाने की पूरी तैयारी करेंगे।”
श्रेया ने कहा: “हमारी सफलता में जिले के खेल अधिकारियों और डीएम मैडम का बहुत बड़ा योगदान है।”
आकृति सोरियान ने कहा: “हम चाहती हैं कि हर लड़की खेलों में आगे आए, समाज का नजरिया बदल रहा है।”
जिला प्रशासन की नई पहलें — “हर गाँव से खिलाड़ी” मिशन
डीएम जसजीत कौर ने बताया कि जिले में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई नई पहलें शुरू की जा रही हैं:
- स्थानीय खेल मैदानों का जीर्णोद्धार और आधुनिक प्रशिक्षण उपकरणों की व्यवस्था
- बालिकाओं के लिए विशेष स्पोर्ट्स कैंप और छात्रावास योजना
- प्रतिभा आधारित प्रोत्साहन फंड – उत्कृष्ट खिलाड़ियों को नियमित आर्थिक सहायता
- कोचिंग एवं मेंटरशिप प्रोग्राम – राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से मार्गदर्शन
🏅 खेल भावना और प्रशासनिक समर्थन का संगम
इस सम्मान कार्यक्रम ने एक संदेश दिया — कि जब प्रशासन, खिलाड़ी और समाज साथ आते हैं, तो उपलब्धि निश्चित होती है।
बिजनौर अब केवल गन्ना या कृषि से नहीं, बल्कि खेलों की भूमि के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।
जिलाधिकारी जसजीत कौर बिजनौर की तीनों पदक विजेता खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करती हुईं — “बेटियाँ अब इतिहास नहीं, भविष्य लिख रही हैं।”
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✍️ विश्लेषण (अवनीश त्यागी की कलम से):
बिजनौर की इन तीन बेटियों ने न केवल अपनी प्रतिभा से जनपद का नाम ऊँचा किया है, बल्कि यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति संसाधनों से बड़ी होती है।
यह कहानी सिर्फ तीन खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों की है जो हर दिन समाज की सीमाओं से लड़कर अपने सपनों को साकार करने का साहस रखती हैं।
जब प्रशासन ऐसा साथ देता है, तो “स्थानीय से वैश्विक” सफर की राह खुद-ब-खुद बन जाती है।










