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“15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासन बना माफियाओं की ढाल”

चांदपुर तहसील में अवैध खनन का संगठित नेटवर्क

करनपुर गावड़ी, नूरपुर और गौहावर में बेरोकटोक मिट्टी खनन; तहसील प्रशासन की मिलीभगत पर उठे सवाल

उपजिलाधिकारी नहीं उठाते फोन 

दस अक्टूबर तक की परमिशन के बाद भी जारी है खनन

बिजनौर, संवाददाता।
जनपद बिजनौर में अवैध मिट्टी खनन का खेल दिनोंदिन संगठित रूप लेता जा रहा है। चांदपुर तहसील के करनपुर गावड़ी, नूरपुर और गौहावर गांवों में मिट्टी खनन के नाम पर बड़े पैमाने पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जहां 8,000 घन मीटर की अनुमति की आड़ में केवल करनपुर गावड़ी में ही 25,000 घन मीटर से अधिक मिट्टी का खनन किया जा चुका है, वहीं अन्य क्षेत्रों में भी यही पैटर्न जारी है।

तहसील प्रशासन की चुप्पी, कार्रवाई शून्य

समाचार प्रकाशित हुए 15 दिन बीत जाने के बाद भी तहसील प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारी शिकायतों पर फोन तक रिसीव नहीं कर रहे, जिससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन न केवल इस खनन पर शह दे रहा है, बल्कि कई मामलों में माफियाओं की ढाल बनकर काम कर रहा है।

पुलिस चौकी के सामने से गुजर रहे ट्रैक्टर

करनपुर गावड़ी में प्रतिदिन 15 से 20 पंजीकृत और गैर पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी ढोते हैं। ये वाहन पैजनियां पुलिस चौकी के सामने से गुजरते हैं और सीसीटीवी कैमरों में कैद भी हो चुके हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य है। यही स्थिति नूरपुर और गौहावर क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है, जहां खनन ट्रैक्टर दिन-रात दौड़ रहे हैं।

विभागीय मिलीभगत के आरोप

ग्रामीणों के अनुसार कार्रवाई न होने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं—

  1. “माहवारी” का खेल – बताया जाता है कि प्रत्येक ट्रैक्टर से तयशुदा रकम संबंधित अधिकारियों तक पहुंचती है।
  2. माफिया का दबाव – संगठित गिरोहों के भय से अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं।

डीएम के आदेश बेअसर

जिलाधिकारी जसजीत कौर ने पहले ही निर्देश दिए थे कि—

  • गैर पंजीकृत वाहन या कृषि प्रयोजन वाले ट्रैक्टर खनन कार्यों में न लगाए जाएं।
  • खनन में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित रहे।

लेकिन तहसील व खनन विभाग के स्तर पर यह आदेश पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।

पर्यावरणीय और राजस्व संकट

  • अवैध खनन से उपजाऊ भूमि की परत समाप्त हो रही है।
  • किसानों की पैदावार प्रभावित हो रही है।
  • गांवों की सड़कों पर भारी ट्रैक्टरों से टूट-फूट और धूल प्रदूषण बढ़ रहा है।

 फ़ैक्ट फ़ाइल: अवैध खनन नेटवर्क – बिजनौर

क्षेत्र अनुमत मात्रा अनुमानित वास्तविक खनन स्थिति
करनपुर गावड़ी 8,000 घन मीटर 25,000+ घन मीटर कार्रवाई नहीं
नूरपुर लगातार मशीनों से खनन प्रशासन मौन
गौहावर दिन-रात ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकथाम नहीं

मुख्य बिंदु:

  • प्रति ट्रॉली अधिकतम सीमा 3 घन मीटर, वास्तविक परिवहन 6–10 घन मीटर।
  • पुलिस व खनन विभाग की मौन स्वीकृति से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद।
  • तहसील प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप गहराए।

सवाल कायम

खनन माफिया खुलेआम शासनादेशों को चुनौती दे रहे हैं, और प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह मौन है। सवाल यह है कि जब सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय शिकायतें मिलीं होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

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