बिजनौर में गुलदार से सुरक्षा की बड़ी मुहिम शुरू
DM जसजीत कौर ने किसान यूनियनों के साथ बैठक में पेश की कार्ययोजना, ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील
वन क्षेत्र में फेंसिंग और चौड़ी खाई का प्रस्ताव
बिजनौर जिले के नजीबाबाद डिवीजन के वन क्षेत्रों में आए दिन गुलदार की बढ़ती गतिविधियों से लोग दहशत में हैं। इस खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाने की दिशा में काम तेज कर दिया है।
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बताया कि पूरे डिवीजन में फेंसिंग और चौड़ी खाई बनाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही गुलदारों की जनसंख्या को नियंत्रण में रखने के लिए स्टरलाइजेशन योजना का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
‘गुलदार मित्र’ बनेंगे ग्रामीण स्वयंसेवक
डीएम ने कहा कि केवल सरकारी प्रयास ही काफी नहीं हैं, इसमें जनसहभागिता भी जरूरी है। उन्होंने किसान यूनियन पदाधिकारियों से अपील की कि प्रभावित क्षेत्रों से ऐसे ग्रामीणों की सूची वन विभाग को दें, जो ‘गुलदार मित्र’ बनने के इच्छुक हों।
इन स्वयंसेवकों को प्रशासन और वन विभाग विशेष प्रशिक्षण देगा, ताकि वे अपने गांवों में जागरूकता फैला सकें और सुरक्षा व्यवस्था में प्रशासन का हाथ बंटा सकें।
ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
गांवों में अक्सर लोग खुले में शौच के लिए बाहर जाते हैं, जिससे गुलदार हमले का खतरा और बढ़ जाता है। डीएम जसजीत कौर ने स्पष्ट कहा—
- ग्रामीण किसी भी हाल में रात को गांव से बाहर शौच के लिए न जाएं।
- घरों में बने शौचालयों का ही प्रयोग करें।
- बच्चों और बुजुर्गों को भी अंधेरा होने के बाद अकेले बाहर न भेजें।
पोल्ट्री फार्म और अपशिष्ट प्रबंधन पर निगरानी
बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को आदेश दिया कि जिले के सभी पोल्ट्री फार्म का निरीक्षण किया जाए।
- जहां अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं हो रहा, वहां नोटिस दिए जाएं।
- अनुपालन न करने पर संबंधित फार्म का लाइसेंस निरस्त किया जाए।
प्रशासन का मानना है कि पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले अपशिष्ट मांसाहारी जानवरों को आकर्षित करते हैं और यह गुलदार के गांवों की ओर आने का एक बड़ा कारण हो सकता है।
मृत पशुओं का निस्तारण आबादी से दूर
डीएम ने यह भी सख्ती से कहा कि मृत पशुओं को कभी भी खुले में न छोड़ा जाए। इसके लिए गांव से दूर गहरी पिट खुदवाकर निस्तारण किया जाए।
इससे गुलदार और अन्य मांसभक्षी जानवर शव खाने के लिए गांव की ओर नहीं आएंगे।
गुलदार सुरक्षा के लिए खास गैजेट और मुखौटे
जनमानस की सुरक्षा हेतु जिला प्रशासन ने सस्ती और कारगर तकनीक भी उपलब्ध कराई है।
- वाइल्डलाइफ रेपेलेंट गैजेट: जो रोशनी और तेज ध्वनि से गुलदार को भगाने में सक्षम है।
- प्लास्टिक मुखौटे: मात्र ₹10 में उपलब्ध, जिन्हें पहनकर ग्रामीण गुलदार को भ्रमित कर सकते हैं।
इन उपकरणों के लिए ग्रामीण सीधे संपर्क कर सकते हैं—
- गैजेट निर्माता: श्री रॉबिन, मोबाइल: 9149374020
- मुखौटा निर्माता: श्री नरेंद्र पाल, मोबाइल: 9758765057
DM का संदेश
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कहा,
“जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ गुलदार से सुरक्षा की दिशा में कदम उठा रहा है। लेकिन यह तभी संभव है जब नागरिक भी सजग रहें, नियमों का पालन करें और प्रशासन के साथ सहयोग करें।”पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी हैं ये कदम?
पिछले कुछ महीनों में जिले में गुलदार की आवाजाही और हमलों के कई मामले सामने आ चुके हैं। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में बच्चों, महिलाओं और मवेशियों पर हमले की घटनाओं ने जनमानस में भय का वातावरण बना दिया है। यही वजह है कि अब प्रशासन ने न केवल भौतिक सुरक्षा (फेंसिंग, खाई, गैजेट) बल्कि जनजागरूकता और जनसहयोग को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया है।
👉 यह पूरा अभियान बिजनौर जिले के लिए सुरक्षा, सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देता है।













