धामपुर शुगर मिल हादसा: वेस्टेज टैंकर से गैस उठी गैस ने ली दो जानें— लापरवाही या सुरक्षा चूक
बिजनौर के धामपुर शुगर मिल में गैस रिसाव से दो मजदूरों की मौत, ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताई; अब सुरक्षा मानकों पर उठ रहे बड़े सवाल
हाइलाइटर्स
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वेस्टेज टैंकर से जहरीली गैस निकलने पर मुकेश पाल और सलमान की मौके पर ही मौत।
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शवों पर कोई बाहरी चोट नहीं, दम घुटना ही मौत का कारण माना जा रहा।
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परिजनों और ग्रामीणों ने जताई हत्या की आशंका, हंगामा कर जताया आक्रोश।
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एसपी पूर्वी, एसडीएम और पुलिस टीम ने मौके का किया निरीक्षण।
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शव पोस्टमार्टम को भेजे गए, जांच और सुरक्षा समीक्षा शुरू।
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हादसे ने उठाए सवाल: औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा कितनी पुख्ता है?
घटनाक्रम विस्तार से
मंगलवार की दोपहर धामपुर शुगर मिल परिसर में बड़ा हादसा हो गया। मिल से जुड़े बायो-वेस्टेज प्लांट पर एक टैंकर सफाई के लिए खड़ा था। इसी दौरान दो लोग — मुकेश पाल (गांव सरकड़ा चकराजमल निवासी, ट्रैक्टर चालक) और सलमान (गांव पल्लावाला निवासी, सहायक) — टैंकर के साथ काम कर रहे थे।
अचानक टैंकर से तेज़ गैस उठी। कुछ ही पलों में दोनों की सांसें थम गईं। जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, दोनों की मौत हो चुकी थी।
मौत का कारण क्या था?
- प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ है कि गैस से दम घुटना ही मौत का कारण रहा।
- शवों पर किसी तरह की चोट या हिंसा के निशान नहीं पाए गए।
- अनुमान है कि टैंकर के भीतर बायो-वेस्टेज के विघटन से मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड या अमोनिया जैसी जहरीली गैसें बनी होंगी।
- ये गैसें ऑक्सीजन की कमी कर देती हैं और कुछ ही सेकंड में दम घुटने लगता है।
परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश
हादसे की खबर जैसे ही बाहर निकली, मृतकों के परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुँच गए।
- परिजनों का आरोप है कि यह महज़ हादसा नहीं, बल्कि हत्या भी हो सकती है।
- ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि मजदूर टैंकर के अंदर क्यों गए और उन्हें सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं दिए गए?
- मौके पर हंगामा हुआ और लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
प्रशासन की कार्रवाई
- एसपी पूर्वी, एसडीएम, थाना पुलिस और अन्य अधिकारी तुरंत मिल परिसर में पहुँचे।
- शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, ताकि वास्तविक कारण की पुष्टि हो सके।
- प्रशासन ने कहा है कि घटना की जांच की जाएगी और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी।
❓ विश्लेषण: क्यों बार-बार हो रहे ऐसे हादसे?
- सुरक्षा उपकरणों की कमी
- मजदूरों को टैंकर की सफाई से पहले ऑक्सीजन मास्क, गैस डिटेक्टर या सेफ्टी बेल्ट क्यों नहीं दिए गए?
- औद्योगिक मानकों की अनदेखी
- बायो-वेस्टेज से जुड़े प्लांट्स में गैस निर्माण आम बात है। फिर भी कई जगहों पर सेफ्टी टेस्ट और गैस मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं होती।
- मिल प्रशासन की जिम्मेदारी
- मिल प्रबंधन का कहना है कि यह दुर्घटना है, लेकिन सवाल उठता है कि बिना प्रबंधन की अनुमति मजदूर टैंकर के अंदर क्यों गए?
- ग्रामीणों का अविश्वास
- ग्रामीणों ने हत्या की आशंका जताई। यह प्रशासन और प्रबंधन पर जनता के कमजोर विश्वास का संकेत है।
ईव्यापक असर
- मजदूर सुरक्षा संकट: यह हादसा बताता है कि मजदूर आज भी बिना पर्याप्त सुरक्षा साधनों के काम करने को मजबूर हैं।
- आर्थिक चोट: मृतकों के परिवारों पर अब रोज़गार और भविष्य का संकट मंडरा रहा है।
- सामाजिक तनाव: स्थानीय स्तर पर प्रशासन और मिल प्रबंधन के खिलाफ गुस्सा बढ़ सकता है।
- औद्योगिक छवि पर असर: ऐसे हादसे प्रदेश की औद्योगिक छवि को भी धक्का पहुँचाते हैं।
कानून और सुरक्षा प्रावधान (प्रसंग में)
- भारत में Factories Act, 1948 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 के तहत हर फैक्ट्री और औद्योगिक इकाई को मजदूरों को सुरक्षा उपकरण देना अनिवार्य है।
- खतरनाक रसायनों या गैस से जुड़े कार्यों में गैस डिटेक्शन सिस्टम, ऑक्सीजन सिलेंडर, रेस्क्यू टीम और सेफ्टी ट्रेनिंग देना ज़रूरी है।
- अगर जांच में लापरवाही साबित होती है तो प्रबंधन पर आपराधिक मुकदमा भी चल सकता है।
धामपुर शुगर मिल का यह हादसा केवल दो जिंदगियों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाला मामला है।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन सिर्फ पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट तक सीमित रहता है या औद्योगिक सुरक्षा सुधारों को लागू करने में सख्ती दिखाता है।












