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बिजनौर में नकली सीमेंट कांड: 800 बोरे पानी में बहाए, सबूत जलाए, क्या हाईवे निर्माण से जुड़ा है पूरा खेल?

बिजनौर में नकली सीमेंट कांड: 800 बोरे पानी में बहाए, सबूत जलाए, क्या हाईवे निर्माण से जुड़ा है पूरा खेल?
बिजनौर से अवनीश त्यागी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

बिजनौर जिले के मंडावर में नकली सीमेंट का खुलासा अब एक बड़े घोटाले का रूप लेता नजर आ रहा है। मामला सिर्फ एक व्यापारी द्वारा नकली सीमेंट बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निर्माण कंपनियों की भूमिका और पुलिस की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पूरा घटनाक्रम, पकड़ से सबूत मिटाने तक

  • एसीसी कंपनी के जिला सेल्स मुखिया ने मंडावर स्थित सय्यद ट्रेडर्स से 800 बोरे नकली सीमेंट पकड़ लिए।
  • पुलिस को शिकायत दी गई, एप्लिकेशन दारोगा व सिपाही तक पहुंची, लेकिन कार्रवाई रुक गई।
  • व्यापारी ने खुद को बचाने के लिए—
    • 800 बोरे सीमेंट पानी में फिंकवा दिए और ग्रामीणों को लुटवा दिए।
    • कंपनी अधिकारियों की मौजूदगी में ही खाली बैग्स को आग के हवाले कर सबूत नष्ट कर दिए।

खड़े हुए बड़े सवाल

  1. अगर सीमेंट नकली था, तो पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
  2. क्या यह पूरा मामला सिर्फ मंडावर तक सीमित है, या जनपदभर में नकली सीमेंट का बड़ा नेटवर्क फैला है?
  3. क्या नेशनल हाइवे और अन्य निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदार और कर्मचारी भी इस खेल में शामिल हैं?

हाईवे कनेक्शन, बड़ा शक

सूत्रों के मुताबिक, जनपद में चल रहे नेशनल हाइवे निर्माण में कई बार मानक से कम सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

  • निर्माण कंपनियों के कर्मचारी कम मात्रा में सीमेंट डालकर काम पूरा करते हैं।
  • बचा हुआ सीमेंट बाजार में बेचा जाता है।
  • आशंका जताई जा रही है कि मंडावर में पकड़ा गया सीमेंट भी इसी खेल का हिस्सा हो सकता है।

यही वजह रही कि—

  • 800 बोरे पानी में फिंकवाए गए,
  • और खाली बैग्स को आग के हवाले किया गया,
    ताकि असली स्रोत और नेटवर्क का कोई सबूत न बचे।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

  • कंपनी अधिकारियों ने जब सीमेंट पकड़ लिया और शिकायत दी, तो पुलिस क्यों चुप रही?
  • क्या किसी दबाव में मामला दबा दिया गया?
  • सबूत नष्ट करने के दौरान पुलिस की मौजूदगी पर भी सवाल उठने लगे हैं।

 सिर्फ नकली सीमेंट नहीं, सुरक्षा से खिलवाड़

यह मामला केवल नकली सीमेंट पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई गंभीर पहलू सामने आते हैं:

  • भ्रष्टाचार और सांठगांठ: व्यापारी, निर्माण कंपनी और पुलिस की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • सुरक्षा खतरे में: घटिया सीमेंट से बने मकान और सड़कें हादसों को न्योता दे रही हैं।
  • राष्ट्रीय परियोजनाओं पर असर: हाइवे जैसे करोड़ों के प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

निष्कर्ष

मंडावर का नकली सीमेंट कांड असल में एक बड़े नेटवर्क और सिस्टम की पोल खोलने वाला मामला है।

  • 800 बोरे सीमेंट पानी में डुबोना और बैग्स जलाना अपने आप में सबसे बड़ा सबूत है कि कोई बड़ी गड़बड़ी छिपाने की कोशिश हुई।
  • प्रशासन और पुलिस की चुप्पी यह साबित करती है कि मामला सतही नहीं बल्कि गहरे तक फैला हुआ है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह सिर्फ मंडावर का खेल है, या जनपदभर में नकली और घटिया सीमेंट की सप्लाई हो रही है?
और क्या हाईवे जैसी राष्ट्रीय परियोजनाओं को भी इसी खेल में नुकसान पहुंचाया जा रहा है?

 

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