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विद्युत कर्मियों का ‘पॉवर सेक्टर बचाओ अभियान’

                विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

विद्युत कर्मियों का ‘पॉवर सेक्टर बचाओ अभियान’

Highlights

  • 08 से 15 अगस्त तक राज्यभर में तिरंगा यात्रा और जनजागरण अभियान

  • निजीकरण के विरोध में 253वें दिन भी जारी है बिजली कर्मचारियों का विरोध

  • राजधानी लखनऊ समेत 30 से अधिक ज़िलों में विरोध सभाएं व रैलियाँ आयोजित

  • 42 गरीब जनपदों की परिसंपत्तियाँ मात्र ₹6500 करोड़ की रिजर्व प्राइस पर बेचे जाने का आरोप

  • बिजली दरों में 45% तक वृद्धि का प्रस्ताव, घरेलू दर ₹13 प्रति यूनिट तक पहुंचने की आशंका

 “बिजली एक सेवा है, व्यापार नहीं”, संघर्ष समिति

लखनऊउत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों का विरोध आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने ऐलान किया है कि 08 अगस्त से 15 अगस्त तक पूरे राज्य में ‘पॉवर सेक्टर बचाओ – तिरंगा यात्रा’ चलाई जाएगी। इस जनजागरण अभियान का उद्देश्य बिजली निजीकरण से गरीब, किसान और मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं को होने वाले नुकसान को जनता तक पहुँचाना है।

 आंदोलन की प्रमुख बातें:

  • यह अभियान काकोरी क्रांति के 100 वर्ष और भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर प्रेरित है।
  • राजधानी लखनऊ में 08 अगस्त को रेजीडेंसी से शहीद स्मारक तक तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी।
  • प्रदेश के 42 गरीब जनपदों की बिजली वितरण प्रणाली निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध।
  • कर्मचारियों का आरोप है कि लगभग ₹1 लाख करोड़ की परिसंपत्तियाँ मात्र ₹6500 करोड़ की रिज़र्व प्राइस पर बेची जा रही हैं।
  • निजी कंपनियों को जमीन सिर्फ ₹1 की लीज पर दी जा रही है।
  • पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा विद्युत दरों में 45% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को भेजा गया है।

प्रभाव और जोखिम: निजीकरण का दुष्परिणाम

  • बिजली दरों में तीन गुना बढ़ोतरी का अनुमान – घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ₹13/unit तक की दर।
  • क्रॉस सब्सिडी मॉडल पर खतरा – जिससे गरीब उपभोक्ताओं को राहत मिलती है।
  • किसानों, गरीबों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति असुरक्षित हो सकती है।
  • कर्मचारियों का कहना है कि बिजली व्यापार नहीं, सेवा है, जबकि कारपोरेट निजीकरण को मुनाफे का माध्यम बना रहे हैं।

 विरोध की व्यापकता:

आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, मिर्जापुर, अलीगढ़, झांसी, बरेली, नोएडा, गाजियाबाद समेत दर्जनों जिलों में कर्मचारियों ने विरोध दिवस मनाया।
हजारों बिजलीकर्मियों ने प्रदर्शन, जनसंपर्क और सभाओं के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।

संयोजक की टिप्पणी:

शैलेन्द्र दुबे, संयोजक ने कहा –

“यह आंदोलन सिर्फ कर्मचारियों का नहीं, जनता का है। अगर पॉवर सेक्टर का निजीकरण हुआ तो गरीबों और किसानों की बिजली पहुंच से बाहर हो जाएगी। हम अपने संसाधनों को औने-पौने दाम पर बिकने नहीं देंगे।”

 निष्कर्ष:

राज्य में बिजली कर्मचारियों का यह जनजागरण अभियान सिर्फ वेतन या सेवा शर्तों का मामला नहीं, बल्कि बिजली क्षेत्र के सार्वजनिक स्वभाव को बचाने की लड़ाई बन चुका है।
क्या सरकार इस आंदोलन को सुनेगी, या जनता को आने वाले समय में महंगी बिजली और निजी मोनोपॉली का सामना करना पड़ेगा?

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रिपोर्ट: TargetTVLive ब्यूरो
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