स्पेशल रिपोर्ट
NHI फ्लाईओवर की बरसात में खुली पोल, पड़ी दरारें, लापरवाही और “संयोगवश बची जानें”
निर्माणाधीन फ्लाईओवर में दरारें ,निर्माण की गुणवत्ता पर गहराया संदेह
बिजनौर। एनएचआई (NHI) द्वारा बनवाया जा रहा फ्लाईओवर पहली बारिश भी नहीं झेल पाया और निर्माण स्थल पर एकाधिक गंभीर दरारें सामने आ गईं। परियोजना अभी पूर्ण नहीं हुई है, लेकिन उसकी हालत देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं – क्या यह विकास है या जानलेवा जाल?
गनीमत रही, कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ
- हादसे के वक्त फ्लाईओवर निर्माण क्षेत्र खाली था, अन्यथा एक बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था।
- लगातार घटिया निर्माण के बाद भी अब तक किसी जान की कीमत नहीं चुकानी पड़ी है – लेकिन कब तक रहेगा नसीब का सहारा?
पिछली घटनाओं का इतिहास भी डरावना
- इससे पूर्व भी एनएचआई द्वारा बनाए जा रहे पुल का लेंटर कुछ ही समय में धराशायी हो गया था।
- बार-बार एक जैसी घटनाएं, लेकिन ना सीख, ना जवाबदेही।
एसडीओ की संदिग्ध भूमिका, ‘सरकारी अफसर’ या ‘निर्माण एजेंसी के एजेंट’?
- आरोप है कि NHI का एसडीओ शुरू से ही निर्माण एजेंसी के पक्ष में झुका रहा।
- मिट्टी की जगह शहर के कूड़े का इस्तेमाल कर सड़क निर्माण शुरू कराया गया।
- स्थानीय लोगों का कहना है – “एसडीओ जैसे काम कर रहे हैं, मानो वह ठेकेदार के मातहत हों।”
लगातार हादसे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
- न पुल गिरने पर सख्त कदम उठे, न अब दरारों के बाद।
- प्रशासनिक चुप्पी जनता को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस करा रही है।
जनता का सवाल, आखिर कब तक सहेंगे हम घटिया निर्माण का बोझ?
- सामाजिक संगठनों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग।
- स्वतंत्र एजेंसी से निर्माण की गुणवत्ता की जांच और दोषियों पर एफआईआर की मांग तेज।
संपादकीय टिप्पणी
NHI की निर्माण परियोजनाएं अब विकास का नहीं, लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बनती जा रही हैं। जब तक ज़िम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय नहीं होती और निर्माण एजेंसियों पर शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक हर पुल, हर सड़क – जनता के लिए एक संभावित खतरा है।
यह रिपोर्ट आपके लिए TargetTVLive की विशेष निगरानी रिपोर्टिंग टीम द्वारा लाई गई है।











