उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा में नया अध्याय
‘पेयरिंग’ मॉडल से बदलेगी सरकारी स्कूलों की सूरत : शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का बड़ा बयान
Target TV Live | रिपोर्ट विशेष : अवनीश त्यागी
“अब बच्चों को मिलेगी बेहतर पढ़ाई, शिक्षक होंगे हर कक्षा में और स्कूल बनेंगे स्मार्ट!”
उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे चुका है। ‘पेयरिंग’ नाम की इस नई पहल के ज़रिए सरकार न सिर्फ़ सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारना चाहती है, बल्कि हर बच्चे को बराबर अवसर देने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने साफ कर दिया है — न कोई स्कूल बंद होगा, न ही किसी शिक्षक की नौकरी जाएगी।
क्या है ‘पेयरिंग’?
सरल शब्दों में कहें तो, ‘पेयरिंग’ यानी पास-पास के छोटे विद्यालयों को एक जगह जोड़कर पढ़ाई कराना, ताकि हर कक्षा के लिए शिक्षक मिल सके और बच्चों को पढ़ाई का माहौल मिले।
अब स्कूलों में क्या होगा खास?
✅ हर कक्षा में टीचर: एकल शिक्षक वाली समस्या खत्म, अब हर कक्षा को मिलेगा विषयानुसार शिक्षक।
✅ पढ़ाई के साथ खेल और प्रोजेक्ट: समूह में काम, पियर लर्निंग और खेलकूद से बच्चों में बढ़ेगा आत्मविश्वास।
✅ रिक्त स्कूल भवनों में नई शुरुआत: जहां छात्र कम हैं, वहां चलेंगी बालवाटिकाएं, आंगनबाड़ी और पूर्व-प्राथमिक कक्षाएं।
✅ जर्जर स्कूलों का कायाकल्प: सेफ्टी ऑडिट जारी, खस्ताहाल इमारतें होंगी दुरुस्त या ध्वस्त।
गांव-गांव शिक्षा का टेक्नोलॉजिकल टच
- 2.6 लाख टैबलेट्स
- 31,000+ स्मार्ट क्लास
- 14,000 से ज्यादा ICT लैब्स
- 746 केजीबीवी हाईटेक स्कूल में तब्दील
बच्चों को मिला सीधा फायदा
₹1200 सीधे खाते में – यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे और स्टेशनरी के लिए सरकार ने भेजी बड़ी राशि।
‘मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय’ – अब गांवों में दिखेगा मॉडर्न स्कूल
- एक ही परिसर में नर्सरी से लेकर 12वीं तक पढ़ाई
- डिजिटल क्लासरूम, लाइब्रेरी, प्ले ज़ोन और स्मार्ट टीचिंग की सुविधा
कुछ आंकड़े जो बताते हैं बदलाव की कहानी
📌 1.26 लाख शिक्षकों की भर्ती
📌 96% स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प से बदलाव
📌 48,000 से अधिक निपुण विद्यालय (2024-25)
📌 शिक्षा बजट का 13% प्राथमिक शिक्षा पर खर्च
‘असर रिपोर्ट’ और ‘परख सर्वे’ में उत्तर प्रदेश का परचम
- बच्चों की उपस्थिति, सीखने की रुचि और नतीजे — सभी मामलों में राष्ट्रीय औसत से आगे यूपी।
राजनीति भी गरमाई…
संदीप सिंह ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तंज कसते हुए कहा:
“पिछले शासनकाल में शिक्षा स्ट्रेचर पर थी, हमने उसे ऑपरेशन करके जीवनदान दिया है।”
‘पेयरिंग’ सिर्फ़ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों को प्राइवेट से भी बेहतर बनाने की शुरुआत है। गांव का बच्चा भी अब टेक्नोलॉजी से पढ़ेगा, स्मार्ट क्लास में सीखेगा और आत्मविश्वास से भरा होगा।
👉 अब शिक्षा केवल अधिकार नहीं, अनुभव भी बनेगी!
ऐसे और बदलावों की खबरों के लिए जुड़े रहें –। Target TV Live के साथ










