जिला NCORD समिति की समीक्षा बैठक
बिजनौर में नशे के खिलाफ कड़ा रुख, अपराधियों की गिरफ्त मजबूत होगी

बिजनौर, 25 जुलाई 2025
जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला NCORD (Narco Coordination Centre) समिति, अभियोजन व कारागार व्यवस्था की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में मादक पदार्थों की रोकथाम, लंबित वादों का निस्तारण, हिस्ट्रीशीटरों पर निगरानी और स्कूलों-कॉलेजों में नशा विरोधी जागरूकता अभियान जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा समेत अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
प्रमुख निर्देश व निर्णय:
🔸 हिस्ट्रीशीटरों पर कड़ी नजर:
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि पुराने अपराधियों पर सतर्क निगरानी रखी जाए और कोर्ट में उनकी सटीक पैरवी हो ताकि कोई भी सजा से बच न सके।
🔸 पॉक्सो मामलों में तेजी:
उन्होंने पॉक्सो एक्ट से जुड़े प्रकरणों की गंभीरता से जांच और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके।
🔸 लंबित मुकदमों का शीघ्र निस्तारण:
वादों की संख्या को कम करने के लिए अधिकारियों से प्रभावी कार्यवाही और फॉलोअप सुनिश्चित करने को कहा गया।
🔸 नेहरू स्टेडियम बना चिंता का कारण:
युवाओं के नशा सेवन की शिकायत पर नेहरू स्टेडियम और अन्य खेल मैदानों में औचक निरीक्षण के आदेश।
🔸 मेडिकल स्टोरों पर निगरानी सख्त:
बिना लाइसेंस दवा बेचने वाली दुकानों पर ड्रग विभाग, पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्यवाही होगी। NDPS एक्ट के तहत सख्ती से कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश।
🔸 विद्यालयों में भी जागरूकता अभियान:
जिला विद्यालय निरीक्षक और बीएसए को स्कूलों में नशा विरोधी अभियान चलाने के निर्देश।
🔸 मादक पदार्थों का त्वरित विनष्टीकरण:
जब्त किए गए ड्रग्स का तत्काल नष्ट किया जाए, ताकि उनके दुरुपयोग की कोई संभावना न बचे।
🔸 तस्करों पर पैनी नजर:
नशा तस्करी में शामिल संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर उन पर निगरानी रखने को कहा गया।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण:
बिजनौर में नशा एक बढ़ती हुई सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है। नेहरू स्टेडियम जैसे सार्वजनिक स्थलों पर युवाओं द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन की शिकायत से प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। यह पहली बार है जब प्रशासन ने शिक्षा विभाग से लेकर मेडिकल स्टोर्स तक एक संयुक्त मोर्चा तैयार किया है।
NCORD समिति की यह बैठक न केवल मादक पदार्थों की रोकथाम बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की तेज़ी, हिस्ट्रीशीटरों पर कड़ा शिकंजा, और जन-जागरूकता की दिशा में एक समन्वित रणनीति की झलक देती है।
स्थानीय नागरिकों की अपेक्षा:
जनता अब चाहती है कि प्रशासन के निर्देश जमीन पर उतरें, और न केवल औचक निरीक्षण बल्कि स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए। युवाओं को नशे से बचाने के लिए जागरूकता के साथ-साथ काउंसलिंग व पुनर्वास केंद्रों की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
Target TV Live
यदि आप भी अपने क्षेत्र की किसी गंभीर सामाजिक समस्या पर प्रशासन से जवाब चाहते हैं, तो हमें लिखें।










