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ग्रेटर नोएडा में जल संकट: टूटी पाइपलाइन से परेशान सेक्टरवासी, प्रदर्शन कर जताया रोष

ग्रेटर नोएडा में जल संकट: टूटी पाइपलाइन से परेशान सेक्टरवासी, प्रदर्शन कर जताया रोष 


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ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-1, अल्फा-1 और अल्फा-2 के निवासी बीते दो सप्ताह से पानी की भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण इलाके में टूटी पड़ी पानी की पाइपलाइन है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। बार-बार शिकायतों के बावजूद जब प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो शनिवार को सेक्टरवासियों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

जल संकट का दायरा और प्रभाव

सेक्टर निवासी हरेंद्र भाटी के अनुसार, अल्फा-1 और अल्फा-2 के गोल चक्कर समेत अन्य स्थानों पर पिछले एक सप्ताह में तीन अलग-अलग जगहों पर पानी की पाइपलाइन टूट चुकी है। इसके चलते पूरे इलाके में जल आपूर्ति बाधित हो गई है और लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।

विशेष रूप से, ग्रेटर नोएडा के मुख्य सेक्टरों में पानी की सप्लाई नियमित रूप से नहीं मिल पा रही है। कई घरों में नल सूखे पड़े हैं, जिससे नागरिकों को घरेलू कार्यों में भारी असुविधा हो रही है। न केवल पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है, बल्कि साफ-सफाई और शौचालय के उपयोग तक में मुश्किलें आ रही हैं।

प्रशासन की उदासीनता पर रोष

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रशासन की लापरवाही को लेकर नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पाइपलाइन की मरम्मत नहीं की गई, जिससे जल संकट गंभीर होता जा रहा है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रमुख नागरिक

प्रदर्शन के दौरान हरेंद्र भाटी, अध्यक्ष सुभाष भाटी, महासचिव एनपी सिंह, सत्येंद्र तोमर, महेश नागर, बबलू पहलवान, देवेंद्र धूलिया, प्रकाश देवी, विमला देवी, रीता देवी, अनीता गौतम, अर्चना मिश्रा, मंजू सिरोही, रेशम खारी, सुदेश, अलका भाटी समेत बड़ी संख्या में सेक्टरवासी मौजूद रहे।

समाधान की मांग

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत संज्ञान लेते हुए टूटी हुई पाइपलाइन की मरम्मत कराए और जल आपूर्ति को सुचारू बनाए। यदि जल्द ही समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा।

ग्रेटर नोएडा जैसे विकसित शहर में जल संकट जैसी मूलभूत समस्या का लंबे समय तक बने रहना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है। नागरिकों के विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को उजागर किया है, लेकिन समाधान के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। अब यह देखना होगा कि क्या प्राधिकरण इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देकर हल करता है या नागरिकों को और लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

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