आंगनवाड़ी चयन में अनियमितता: योग्यता की अनदेखी और पक्षपात का आरोप

BANDA. जिला बांदा के ग्राम पंचायत बदौसा में आंगनवाड़ी कार्यकत्री के चयन में अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। प्रार्थिनी पूजा वर्मा, जिन्होंने इस पद के लिए आवेदन किया था, ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर चयन प्रक्रिया में धांधली की शिकायत की है।
मेरिट सूची में प्रथम होने के बावजूद चयन से वंचित
पूजा वर्मा के अनुसार, उन्होंने बंगाली पुरवा बदौसा से आंगनवाड़ी कार्यकत्री पद के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था और समय पर दस्तावेजों की जांच भी करवाई थी। उनके शैक्षणिक दस्तावेज मेरिट सूची में प्रथम स्थान पर थे, इसके बावजूद उनका चयन नहीं किया गया। इसके पीछे उनके आय प्रमाण पत्र को आधार बनाकर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया।
आय प्रमाण पत्र पर सवाल
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि लेखपाल की लापरवाही के कारण उनके आय प्रमाण पत्र में वार्षिक आय 52,000 रुपये दर्शाई गई, जबकि अन्य अभ्यर्थी मधुनंदा गडावा, जिनका चयन हुआ है, की वास्तविक आय इससे अधिक होने के बावजूद उन्हें कम आय वर्ग में रखा गया।
पूजा वर्मा का आरोप है कि चयनित अभ्यर्थी के पति का मासिक वेतन 18,000 से 20,000 रुपये है, फिर भी उन्हें चयनित कर लिया गया। इसके विपरीत, पूजा वर्मा का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, क्योंकि उनके पति कुष्ठ रोग से ग्रसित हैं और कार्य करने में असमर्थ हैं।
पक्षपात और राजनीतिक प्रभाव का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, चयनित अभ्यर्थी का संबंध ग्राम प्रधान से है, जिसके कारण चयन प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई। उन्होंने मांग की है कि उनके आय प्रमाण पत्र की पुनः जांच की जाए और निष्पक्ष रूप से मेरिट के आधार पर चयन किया जाए।
प्रशासन की जिम्मेदारी
इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि आंगनवाड़ी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और पक्षपात की आशंका बनी हुई है। यदि प्रशासन इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करता है, तो यह न केवल न्याय सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाने में भी सहायक होगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पूजा वर्मा को न्याय मिल पाता है या नहीं।










