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बांदा: शराब के ठेके से परेशान बस्तीवासी, छात्राओं की सुरक्षा पर संकट

बांदा: शराब के ठेके से परेशान बस्तीवासी, छात्राओं की सुरक्षा पर संकट
बांदा। जिले की एक बस्ती में आबादी के बीच स्थित शराब का ठेका स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। खासतौर पर कोचिंग और स्कूल जाने वाली छात्राओं को इस ठेके के पास शराबियों की भीड़ से रोजाना जूझना पड़ रहा है। मोहल्ले के लोगों ने प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

समस्या की जड़ और स्थानीय लोगों की चिंता

स्थानीय निवासियों के अनुसार, ठेके के पास शराबियों का जमावड़ा दिनभर लगा रहता है, लेकिन शाम होते ही स्थिति और भी भयावह हो जाती है। शराब के नशे में धुत्त लोग सड़क पर हुड़दंग मचाते हैं, गाली-गलौज करते हैं और खुले में पेशाब करते हैं, जिससे इलाके में अराजकता का माहौल बन गया है।

एक निवासी ने कहा, “हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह ठेका बस्ती के बेहद करीब है, जबकि नियमों के अनुसार शराब का ठेका आबादी से कम से कम 500 मीटर दूर होना चाहिए।”

छात्राओं के माता-पिता इस समस्या से सबसे अधिक परेशान हैं। एक अभिभावक का कहना है, “हमारी बेटियाँ कोचिंग जाने से डरती हैं। शराबी रास्ते में उन्हें परेशान करते हैं। यह ठेका हमारी सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा दोनों के लिए खतरा है।”

प्रशासन की उदासीनता और नियमों का उल्लंघन

सरकार के नियमों के अनुसार, शराब के ठेके आबादी से दूर होने चाहिए, लेकिन बांदा की इस बस्ती में प्रशासन ने इस नियम की अनदेखी कर दी है। क्षेत्रवासियों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

समस्या का व्यापक प्रभाव

  1. छात्राओं की शिक्षा पर असर: शराबियों की मौजूदगी के कारण कई छात्राएँ कोचिंग जाने में झिझक रही हैं। इससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है।
  2. महिला सुरक्षा पर संकट: शराब के ठेके के पास से गुजरने वाली महिलाएँ असुरक्षित महसूस करती हैं।
  3. सामाजिक ताना-बाना प्रभावित: शराबियों के हुड़दंग से इलाके का माहौल बिगड़ रहा है, जिससे अन्य परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों की माँग और संभावित समाधान

मोहल्ले वासियों ने जिला प्रशासन से इस ठेके को हटाने की माँग की है। यदि जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन करने को भी तैयार हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। ठेके को आबादी से दूर स्थानांतरित करना एक आवश्यक कदम होगा। साथ ही, क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए ताकि महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

अगर इस गंभीर समस्या को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो यह न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन की लापरवाही उजागर करेगा।

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