उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण पर संग्राम: विरोध में महापंचायतों का ऐलान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया को अवैधानिक करार देते हुए सरकार पर घोटाले के गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का दावा है कि पूरी बिडिंग प्रक्रिया मनमाने तरीके से चलाई जा रही है, जिसमें पारदर्शिता और निष्पक्षता की अनदेखी हो रही है। इस मुद्दे पर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है, और अब संघर्ष समिति ने 24 मार्च को मेरठ और 29 मार्च को वाराणसी में बिजली महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया है।
निजीकरण की प्रक्रिया पर उठे सवाल
संघर्ष समिति के मुताबिक, ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की बिडिंग प्रक्रिया में कई अनियमितताएं बरती गई हैं। जिन तीन कंपनियों को बिडिंग प्रक्रिया में शामिल किया गया है, वे कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट के दायरे में आती हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका मूल्यांकन किया जा रहा है। समिति का आरोप है कि पावर कॉर्पोरेशन के उच्च अधिकारी मनचाही कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए दबाव बना रहे हैं। यदि यह सच साबित होता है, तो यह बिजली निजीकरण में एक बड़े घोटाले की ओर संकेत करता है।
बिजलीकर्मियों में आक्रोश, पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, झांसी, बरेली समेत प्रदेश के कई जिलों में विरोध सभाएं आयोजित की गईं। बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने सरकार के इस कदम के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया को नहीं रोका गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
बिजली महापंचायत और लखनऊ रैली की तैयारी
संघर्ष समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को आम जनता तक लेकर जाएंगे। 24 मार्च को मेरठ और 29 मार्च को वाराणसी में बिजली महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें कर्मचारी, अभियंता और आम नागरिक शामिल होंगे। इसके बाद 09 अप्रैल को लखनऊ में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से बिजली कर्मचारी और अभियंता भाग लेंगे।
क्या यूपी में बिजली निजीकरण घोटाले की ओर बढ़ रहा है?
संघर्ष समिति के आरोपों से यह सवाल उठता है कि क्या यूपी में बिजली निजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता से समझौता किया जा रहा है? यदि सरकारी अधिकारियों द्वारा निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, तो यह एक गंभीर मामला है। इस मुद्दे को लेकर कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ जनता में भी असंतोष बढ़ सकता है, जिससे सरकार के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है।
आने वाले दिनों में इन महापंचायतों और रैली के जरिए बिजलीकर्मियों का आंदोलन क्या नया मोड़ लेगा, यह देखने लायक होगा।












