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बिजनौर में राष्ट्रीय लोक अदालत का ऐतिहासिक आयोजन: हजारों मामलों का निपटारा, करोड़ों की राहत राशि

बिजनौर में राष्ट्रीय लोक अदालत का ऐतिहासिक आयोजन: हजारों मामलों का निपटारा, करोड़ों की राहत राशि

BIJNOR . जनपद बिजनौर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक नई मिसाल कायम की है। इस विशेष आयोजन में हजारों लंबित मामलों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान हुआ, जिससे लोगों को वर्षों से चली आ रही कानूनी उलझनों से मुक्ति मिली। अदालत में जुर्माना और समझौता राशि के रूप में करोड़ों रुपये की वसूली की गई, जिससे जनता को न्याय के साथ आर्थिक राहत भी मिली।

आंकड़ों में न्याय की बड़ी जीत:

  • कुल मामलों का निस्तारण: 61,336
  • वसूली गई जुर्माना राशि: ₹11,78,600
  • तय की गई समझौता राशि: ₹29,22,43,094

इस अभूतपूर्व उपलब्धि से न केवल मामलों का त्वरित निपटारा हुआ, बल्कि जनपद में न्यायिक प्रक्रिया की गति और लोक अदालतों की प्रभावशीलता भी उजागर हुई।

प्रमुख न्यायिक निर्णय:

  • जिला न्यायाधीश मदन पाल सिंह ने 2 मामलों में ₹4,60,000 की समझौता धनराशि तय की।
  • प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, राजेश्वरी टॉमसन ने 22 मामलों का निस्तारण कर ₹3,76,000 की समझौता राशि दिलाई।
  • अपर जिला न्यायाधीश रामस्वरूप यादव ने 3 मामलों का निस्तारण करते हुए ₹6,85,000 की वसूली की।
  • विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) अशोक कुमार सिंह ने 2 मामलों में ₹1,500 की जुर्माना राशि तय की।
  • सिविल जज (जूनियर डिवीजन) ने 456 मामलों में ₹4,840 की वसूली की।
  • ग्रामीण न्यायालयों ने ₹3,75,000 की जुर्माना राशि वसूली।

समझौतों से समाज में समरसता:

अदालत में 46,363 मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से हुआ, जिससे ₹24,66,31,415 की भारी समझौता राशि तय की गई। यह लोक अदालत की सफलता को दर्शाता है, जहां कानूनी संघर्षों को कोर्ट के बाहर सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाता है।

लोक अदालत का असर:

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनसामान्य के लिए वरदान साबित हुआ। इससे छोटे-मोटे विवादों से लेकर बड़े आर्थिक मामलों तक का समाधान जल्दी और बिना अतिरिक्त खर्च के संभव हुआ। इससे न केवल न्यायपालिका पर बोझ कम हुआ, बल्कि समाज में शांति और विश्वास की भावना भी मजबूत हुई।

सचिव/अपर जिला न्यायाधीश
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर

“राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय और जनसेवा का सशक्त मंच है, जहां लोगों को न केवल कानूनी राहत मिलती है, बल्कि समाज में सौहार्द और विश्वास भी बढ़ता है।”

 

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