पं. गोविन्द बल्लभ पंत की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि: मुख्यमंत्री ने पंत जी की विरासत को याद किया
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुशल प्रशासक पं. गोविन्द बल्लभ पंत की पुण्यतिथि पर प्रदेशभर में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित पं. गोविन्द बल्लभ पंत पार्क में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पंत जी के जीवन, संघर्ष और उनकी अमूल्य सेवाओं को स्मरण करते हुए कहा कि उनका योगदान भारतीय राजनीति और प्रशासन के लिए सदैव प्रेरणादायक रहेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पं. गोविन्द बल्लभ पंत न केवल उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे, बल्कि एक कुशल अधिवक्ता और दृढ़ संकल्पित राजनेता के रूप में उन्होंने प्रदेश और देश को नई दिशा दी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी भूमिका अहम रही, और आजादी के बाद वे प्रदेश की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में जुट गए। वर्ष 1954 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने के बाद, उन्होंने देश के गृह मंत्री के रूप में राष्ट्र की सेवा की।
हिन्दी को राजभाषा बनाने का श्रेय
योगी आदित्यनाथ ने पं. पंत की भाषा और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्थापित करने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। उनकी इस ऐतिहासिक भूमिका के लिए वर्ष 1957 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जो उनकी राष्ट्रभक्ति और सेवाभावना का प्रमाण है।
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
गोरखपुर विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की आधारशिला पं. गोविन्द बल्लभ पंत के कर-कमलों द्वारा रखी गई थी। यह विश्वविद्यालय आज भी ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है, जो पंत जी के दूरदर्शी दृष्टिकोण की याद दिलाता है।
जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में सांसद रवि किशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक प्रदीप शुक्ला, विपिन सिंह, महेन्द्र पाल सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। सभी ने पं. पंत के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनकी प्रेरणादायक जीवनगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
पंत जी की विरासत: प्रेरणा का स्रोत
पं. गोविन्द बल्लभ पंत का जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अथाह प्रेम की मिसाल है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम की बात हो या आजादी के बाद देश की व्यवस्था को मजबूती देने की — हर भूमिका में उन्होंने अपने अद्वितीय नेतृत्व का परिचय दिया। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करने और एक समृद्ध, सशक्त भारत के निर्माण के लिए सतत प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।
इस श्रद्धांजलि समारोह ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि पं. गोविन्द बल्लभ पंत की विरासत अमिट है, और उनका योगदान सदियों तक स्मरणीय रहेगा।










