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प्रियांशु की ऐतिहासिक उपलब्धि: जनपद से विश्व मंच तक का सफर

प्रियांशु की ऐतिहासिक उपलब्धि: जनपद से विश्व मंच तक का सफर

BIJNOR. ग्राम बहादुरपुर जट के 20 वर्षीय प्रियांशु ने विश्व शूटिंग चैंपियनशिप के लिए चयनित होकर इतिहास रच दिया है। कोच आकाश कुमार के प्रशिक्षण में अपनी प्रतिभा को निखारते हुए प्रियांशु ने दस मीटर राइफल स्पर्धा में तीसरा स्थान प्राप्त कर यह स्थान हासिल किया। मई में जर्मनी में होने वाली इस चैंपियनशिप में भाग लेना न केवल प्रियांशु के लिए बल्कि पूरे जनपद के लिए गर्व की बात है।

संघर्ष और संकल्प की कहानी
प्रियांशु की यह सफलता यूं ही नहीं मिली। इससे पहले दो बार वे चयन प्रक्रिया में रैंक कम होने के कारण चूक गए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में उन्होंने अपने प्रदर्शन को बेहतर करते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की की। यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार की गई मेहनत का परिणाम है। उनके कोच आकाश कुमार ने बताया कि प्रियांशु रोज़ाना चार से पांच घंटे कठिन अभ्यास करते हैं, जिससे उनकी तकनीक और मानसिक दृढ़ता मजबूत होती है।

जनपद के लिए प्रेरणा
प्रियांशु की इस सफलता ने जनपद के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना दिया है। उनकी इस उपलब्धि से यह साबित होता है कि छोटे गांवों से भी विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है, बशर्ते मेहनत, समर्पण और सही मार्गदर्शन मिले। प्रियांशु ने अपने चयन को न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि बल्कि जनपद के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी एक बड़ा अवसर बताया। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र में शूटिंग जैसे खेलों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

बधाइयों का सिलसिला
प्रियांशु के चयन की खबर मिलते ही बधाइयों का तांता लग गया। विवेकानंद दिव्य भारती के अध्यक्ष योगेंद्र पाल सिंह योगी, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी बिजनौर के चेयरमैन टीकम सिंह सेंगर, और जिला व्यायाम शिक्षक अरविंद अहलावत समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें और उनके कोच को शुभकामनाएं दीं। सभी ने आशा व्यक्त की है कि प्रियांशु चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए मेडल जीतेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

भविष्य की संभावनाएं
प्रियांशु अब तक पांच बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग ले चुके हैं और निरंतर अपनी तकनीक को सुधार रहे हैं। उनका समर्पण और खेल के प्रति जुनून यह इशारा करता है कि वे भविष्य में भारतीय शूटिंग टीम के एक अहम खिलाड़ी बन सकते हैं। उनकी सफलता से क्षेत्र में खेल संस्कृति को नई दिशा मिलेगी, जिससे और भी युवा खिलाड़ी इस खेल में रुचि लेकर मेहनत करेंगे।

प्रियांशु की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे जनपद की सामूहिक सफलता है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ा जाए, तो किसी भी मंजिल को पाया जा सकता है। अब सभी की निगाहें जर्मनी में होने वाली विश्व चैंपियनशिप पर टिकी हैं, जहां प्रियांशु अपने अद्भुत निशाने से भारत के लिए गौरव का पल लाने की तैयारी कर रहे हैं। हम सब उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटेंगे।

जय हिंद!

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