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बिजली निजीकरण के खिलाफ देशभर में जोरदार विरोध प्रदर्शन, 27 लाख कर्मी उतरे सड़कों पर

बिजली निजीकरण के खिलाफ देशभर में जोरदार विरोध प्रदर्शन, 27 लाख कर्मी उतरे सड़कों पर

लखनऊ।: बिजली के निजीकरण के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर आज सभी राज्यों में बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया। खासकर चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर जबरदस्त नाराजगी देखी गई।

चंडीगढ़ में मुनाफे में चल रहे बिजली विभाग को निजी कंपनी को सौंपे जाने के फैसले पर भारी रोष

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि चंडीगढ़ में विद्युत विभाग को एमिनेंट इलेक्ट्रिक डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को सौंपने के फैसले से बिजली कर्मचारियों में गुस्सा फूट पड़ा है। इसके विरोध में 1 फरवरी को भी राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

इसी तरह, उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की तैयारी चल रही है। इससे प्रदेश के 42 जिलों की बिजली व्यवस्था निजी कंपनियों के हाथों में जाने की संभावना है। वहीं, राजस्थान में भी विद्युत वितरण का निजीकरण किया जा रहा है, जबकि विद्युत उत्पादन निगम को एनटीपीसी और कोल इंडिया लिमिटेड को सौंपने की योजना बनाई जा रही है।

ऊर्जा मंत्रालय के मंत्री समूह की रिपोर्ट आने तक निजीकरण पर रोक की मांग

संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिजली वितरण के निजीकरण से जुड़े सभी फैसलों को तब तक रोका जाए जब तक कि ऊर्जा मंत्रालय द्वारा गठित मंत्री समूह अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देता। इस मंत्री समूह का नेतृत्व केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद यश नायक कर रहे हैं, जिसमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री शामिल हैं। इसका संयोजन उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा कर रहे हैं।

समिति ने कहा कि सरकार ने 2020 में बिजली वितरण के निजीकरण के लिए एक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया था, लेकिन इसे अब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अब सरकार ने बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए एक मंत्री समूह का गठन किया है, इसलिए जब तक इसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।

संविदा कर्मियों की छंटनी से बढ़ रहा आक्रोश

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण से पहले बिजली कर्मचारियों में भय का माहौल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को निकाला जा रहा है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हुआ प्रदर्शन

आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, जवाहरपुर, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा समेत कई शहरों में बिजली कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन और तेज होगा।

 

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