बीएसए कार्यालय में स्टॉक रजिस्टर कहां? लाखों के कबाड़ का हिसाब भी सवालों में, जानकारी मांगने पर मीडिया को जवाब देने से इनकार!
बिजनौर | TargetTvLive विशेष रिपोर्ट
रिपोर्टिंग एवं संपादन: अवनीश त्यागी
बिजनौर के बेसिक शिक्षा विभाग में स्टॉक रजिस्टर और पुराने सरकारी सामान के निस्तारण को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि कार्यालय में स्टॉक रजिस्टर उपलब्ध नहीं है और लाखों रुपये मूल्य के बताए जा रहे कबाड़ का हिसाब भी स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में जानकारी मांगने पर बीएसए की ओर से कथित तौर पर यह कहकर जवाब देने से इनकार किया गया कि मीडिया कर्मी जानकारी मांगने के अधिकृत नहीं हैं।
सवाल सीधा है—सरकारी रिकॉर्ड और सामान का हिसाब स्पष्ट करने में आखिर परेशानी क्या है?
स्टॉक रजिस्टर नहीं तो सरकारी सामान का हिसाब कैसे?
सरकारी कार्यालयों में स्टॉक रजिस्टर सामान की खरीद, उपलब्धता, हस्तांतरण और निस्तारण का महत्वपूर्ण अभिलेख होता है। यदि बीएसए कार्यालय में यह रजिस्टर उपलब्ध नहीं है, तो इसकी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं, पुराने सामान को कबाड़ घोषित कर निस्तारित किया गया है तो उसकी सूची, मूल्यांकन, सक्षम अधिकारी की स्वीकृति और नीलामी अथवा अन्य निर्धारित प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आना चाहिए।
मीडिया को जानकारी देने से इनकार पर सवाल
पत्रकार को हर सरकारी अभिलेख तक स्वतः पहुंच का अधिकार नहीं है, लेकिन सार्वजनिक हित से जुड़े सवाल पूछना और सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। आरटीआई के तहत उपलब्ध सूचना निर्धारित प्रक्रिया और कानूनी अपवादों के अनुसार दी जाती है।
ऐसे में यदि मीडिया कर्मी को केवल इस आधार पर जानकारी देने से इनकार किया गया कि वह अधिकृत नहीं है, तो संबंधित अधिकारी को अपने जवाब का आधार स्पष्ट करना चाहिए।
नियुक्तियों और पदस्थापन पर भी पारदर्शिता जरूरी
बीएसए कार्यालय में नियुक्तियों, प्रतिस्थापन और पदस्थापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की सच्चाई संबंधित आदेशों, नियमों और विभागीय अभिलेखों की जांच से ही सामने आ सकती है। इसलिए विभाग को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब बीएसए कार्यालय से पांच सवाल हैं:
- स्टॉक रजिस्टर की वर्तमान स्थिति क्या है?
- पुराने सरकारी सामान की सूची और निस्तारण का रिकॉर्ड कहां है?
- कथित लाखों रुपये के कबाड़ का मूल्यांकन किस आधार पर हुआ?
- नियुक्तियों और पदस्थापन में लागू नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया?
- मीडिया को जानकारी देने से कथित इनकार किस नियम के आधार पर किया गया?
सरकारी संसाधनों और अभिलेखों से जुड़े सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से मिलना चाहिए।












