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मेरठ–हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे के लिए बिजनौर में भूमि क्रय की प्रक्रिया तेज, 107 गांवों में दर निर्धारण

मेरठ–हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे: बिजनौर के 109 गांवों में जमीन खरीद की तैयारी तेज, 107 गांवों में दर तय करने की कवायद

TargetTvLive | विशेष रिपोर्ट | अवनीश त्यागी

बिजनौर में एक्सप्रेसवे परियोजना की जमीन संबंधी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश • दो गांवों में विज्ञप्ति का इंतजार • पेड़ों, बिजली के खंभों और तारों का भी होगा सर्वे

बिजनौर, 13 अक्टूबर। मेरठ–हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को गति देने के लिए बिजनौर में भूमि क्रय की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है। जिले की तीन तहसीलों के 109 गांव इस परियोजना के दायरे में हैं। इनमें से 107 गांवों में किसानों की आपसी सहमति से जमीन खरीदने के लिए दर निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है, जबकि शेष दो गांवों में विज्ञप्ति प्रकाशित कराने की कार्रवाई बाकी है।

जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने मंगलवार को परियोजना की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को भूमि क्रय से जुड़ी औपचारिकताएं प्राथमिकता से पूरी करने के निर्देश दिए। हालांकि, परियोजना की गति केवल जमीन की दरें तय करने तक सीमित नहीं है। जमीन पर मौजूद परिसंपत्तियों का मूल्यांकन, पेड़ों के संबंध में वन विभाग की अनुमति और बिजली के खंभों व तारों का सर्वे भी आगे की प्रक्रिया के अहम हिस्से हैं।

बिजनौर के किन गांवों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे?

परियोजना के लिए जिले की तीन तहसीलों के गांवों को शामिल किया गया है।

  • सदर तहसील: 62 गांव
  • चांदपुर तहसील: 34 गांव
  • नजीबाबाद तहसील: 13 गांव

इस तरह कुल 109 गांव परियोजना के दायरे में हैं। यूपीईडा की ओर से भेजे गए भू-अर्जन प्लान में आवश्यक संशोधन करने के बाद संशोधित योजना जिलाधिकारी के स्तर से वापस यूपीईडा को भेज दी गई है।

यह प्रक्रिया परियोजना के लिए भूमि संबंधी तैयारियों का महत्वपूर्ण चरण है। आगे की प्रगति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि संबंधित विभाग भूमि की दरें तय करने, परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करने और अन्य जरूरी औपचारिकताएं कितनी तेजी से पूरी करते हैं।

107 गांवों में जमीन खरीद की प्रक्रिया कहां तक पहुंची?

प्रशासन के अनुसार, 107 गांवों में किसानों की आपसी सहमति से भूमि खरीदने के लिए दर निर्धारण की कार्रवाई की जा रही है। इन गांवों के संबंध में विज्ञप्ति प्रकाशित कराई जा चुकी है।

शेष दो गांवों के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित कराने के संबंध में 6 अक्टूबर 2026 को पत्र भेजा गया था। इन गांवों में भी विज्ञप्ति प्रकाशित कराने की कार्रवाई की जानी है।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 107 गांवों में दर निर्धारण की प्रक्रिया चलने का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी गांवों में जमीन की खरीद पूरी हो चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूमि क्रय की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और कई औपचारिकताएं अभी पूरी की जानी हैं।

जमीन की कीमत कौन तय करेगा, मूल्यांकन कैसे होगा?

भूमि क्रय की प्रक्रिया में संबंधित तहसीलों के तहसीलदार दर निर्धारण से जुड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। वहीं, जमीन पर मौजूद परिसंपत्तियों का मूल्यांकन लोक निर्माण विभाग के स्तर से किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि दर निर्धारण के संबंध में तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में उपनिबंधकों के साथ एआईजी स्टांप को भी शामिल किया जाए। इसका उद्देश्य भूमि की दरों से संबंधित प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की भूमिका सुनिश्चित करना है।

किसानों के लिए यह चरण खास महत्व रखता है, क्योंकि भूमि क्रय की प्रक्रिया में निर्धारित दरों और जमीन पर मौजूद परिसंपत्तियों के मूल्यांकन की भूमिका रहती है। हालांकि, गांववार प्रस्तावित दरों, मुआवजे की राशि और अब तक खरीदी गई भूमि का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

पेड़ कटेंगे तो वन विभाग की अनुमति जरूरी, बिजली लाइनों का भी सर्वे

एक्सप्रेसवे के निर्धारित संरेखण में आने वाले पेड़ों के संबंध में जिलाधिकारी ने जिला वन अधिकारी से समन्वय कर आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही परियोजना की जद में आने वाली भूमि के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों और खंभों का सर्वे कराने को कहा गया है। विद्युत विभाग को इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

इन निर्देशों से स्पष्ट है कि परियोजना के लिए केवल भूमि खरीद ही नहीं, बल्कि रास्ते में आने वाली अन्य परिसंपत्तियों और विभागीय अनुमतियों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण हैं। इनका समय पर निस्तारण निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती: तेजी भी और पारदर्शिता भी

जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने राजस्व कर्मियों को भूमि क्रय की प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ किसी भी तरह की अनियमितता या गलती से बचने के निर्देश दिए। किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भूमि क्रय की कार्रवाई आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

परियोजना के संदर्भ में अब निगाह इस बात पर रहेगी कि शेष दो गांवों में विज्ञप्ति कब प्रकाशित होती है, 107 गांवों में दर निर्धारण की प्रक्रिया कब पूरी होती है और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन तथा विभागीय अनुमतियों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।

विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो परियोजना की अगली महत्वपूर्ण कसौटी केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि जमीन पर प्रक्रिया की वास्तविक प्रगति होगी। गांववार दर निर्धारण, भूमि क्रय की स्थिति, किसानों को भुगतान और विभागीय बाधाओं के निस्तारण से ही परियोजना की प्रगति का स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।

बैठक में अपर जिलाधिकारी न्यायिक शरद कुमार पाल, संबंधित तहसीलों के उपजिलाधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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