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SP के आदेश में 8 नाम, FIR में सिर्फ 4! बिजनौर में पुलिस कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल

बिजनौर में SP के आदेश के बाद FIR पर बड़ा सवाल: 8 नाम, मुकदमे में सिर्फ 4! शिकायतकर्ता ने फिर लगाई गुहार

अफजलगढ़ में मकान विवाद का मामला गरमाया, पुराने प्रार्थना पत्र से सामने आई पूरी कहानी; 2020 से चल रहा विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंचा
अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर/अफजलगढ़। अफजलगढ़ में मकान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। शिकायतकर्ता हाजी मोहम्मद रिजवान कुरैशी ने पुलिस अधीक्षक को दोबारा प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि एसपी के आदेश में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन थाना अफजलगढ़ ने एफआईआर में केवल चार लोगों को ही आरोपी बनाया।

शिकायतकर्ता ने अब पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि आदेश और दर्ज FIR के बीच अंतर की जांच कराई जाए और आदेश में शामिल बाकी चार लोगों को भी मुकदमे की विवेचना में शामिल किया जाए।

मामला नया नहीं, 2020 से चल रहा है विवाद

शिकायतकर्ता द्वारा 30 जून 2026 को दिए गए मूल प्रार्थना पत्र में बताया गया कि उसने 14 अक्टूबर 2020 को मोहल्ला बेगमसराय में एक मकान खरीदा था। शिकायतकर्ता का दावा है कि मकान खरीदने के बावजूद उसे मकान खाली नहीं मिला।

इसके बाद मकान को लेकर विवाद बढ़ता गया और शिकायतकर्ता ने पुलिस अधिकारियों से कई बार शिकायत की। दस्तावेज में वर्ष 2024 और 2025 में हुई पुलिस जांचों का भी उल्लेख है।

2025 में मौके पर पहुंची पुलिस, फिर भी नहीं सुलझा मामला

शिकायतकर्ता के अनुसार 2 मई 2025 को कस्बा इंचार्ज प्रवीण कुमार पुलिस अधिकारियों के आदेश पर मौके पर पहुंचे थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज की और मकान की दोबारा जांच कराने पर जान से मारने की धमकी दी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद भी मकान से जुड़ा विवाद खत्म नहीं हुआ।

अप्रैल 2026 में भी हुई जांच

मूल प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि 10 अप्रैल 2026 को थाना स्तर पर और 12 अप्रैल 2026 को कस्बा इंचार्ज द्वारा मकान की जांच की गई।

इसके बावजूद शिकायतकर्ता के अनुसार उसे कथित तौर पर धमकियां मिलती रहीं और मकान खाली नहीं कराया गया।

30 जून को SP से मांगी FIR

लगातार चल रहे विवाद के बीच हाजी मोहम्मद रिजवान कुरैशी ने 30 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक बिजनौर को प्रार्थना पत्र दिया। इसमें मकान के नाम पर कथित ठगी, धोखाधड़ी, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई।

इसके बाद मामले की जांच CO अफजलगढ़ को सौंपी गई।

CO की जांच के बाद SP ने दिया 8 नामों पर कार्रवाई का आदेश

शिकायतकर्ता के मुताबिक CO अफजलगढ़ की जांच 4 अगस्त 2026 को SP कार्यालय पहुंची। शिकायत में दावा किया गया है कि जांच आख्या में आठ नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की गई।

इसके बाद 6 अगस्त 2026 को SP की ओर से थाना अफजलगढ़ को आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिए जाने की बात शिकायतकर्ता ने कही है।

यहीं से पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया।

SP के आदेश में 8 नाम, FIR में 4 ही क्यों?

शिकायतकर्ता के अनुसार 7 अगस्त 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 0183/2026 दर्ज किया गया। FIR में धारा 318(4), 351(3), 352 और 3(5) BNS लगाई गई हैं।

लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि SP के आदेश में जिन आठ लोगों के नाम थे, उनमें से केवल चार को FIR में शामिल किया गया।

यानी सवाल सीधा है—

अगर आदेश आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का था, तो FIR में चार नाम ही क्यों आए?

इसी सवाल को लेकर शिकायतकर्ता ने 8 अगस्त को फिर SP कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है।

इन चार नामों को लेकर है शिकायत

शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से निम्न चार लोगों को भी मुकदमे में शामिल करने की मांग की है—

मोहम्मद इदरीश कुरैशी, कलवा कुरैशी, मोहम्मद सलीम अंसारी और मोहम्मद वसीम अंसारी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि ये चारों नाम SP के आदेश में शामिल थे, इसलिए इनके संबंध में भी नियमानुसार जांच और विवेचना होनी चाहिए।

एक तरफ आदेश, दूसरी तरफ FIR—अब पुलिस से जवाब की उम्मीद

इस मामले में अब सबसे अहम दस्तावेज 6 अगस्त का SP आदेश और 7 अगस्त की FIR हैं। शिकायतकर्ता ने दोनों की प्रतियां अपने नए प्रार्थना पत्र के साथ लगाई हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रशासन आदेश और FIR में सामने आए अंतर को किस तरह देखता है और क्या शेष चार नामों के संबंध में कोई अतिरिक्त कार्रवाई की जाती है।

विवाद की पूरी कहानी एक नजर में

2020: शिकायतकर्ता के अनुसार मकान खरीदा गया।
2024: मामला CO अफजलगढ़ कार्यालय तक पहुंचा।
मई 2025: पुलिस ने मौके पर जांच की।
अप्रैल 2026: मकान की दोबारा जांच हुई।
30 जून 2026: SP से मुकदमा दर्ज कराने की मांग।
4 अगस्त 2026: CO की जांच आख्या SP कार्यालय पहुंचने का दावा।
6 अगस्त 2026: आठ नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश का दावा।
7 अगस्त 2026: FIR संख्या 0183/2026 में चार लोगों पर मुकदमा।
8 अगस्त 2026: शेष चार नामों को शामिल करने के लिए फिर SP से शिकायत।

अब आगे क्या?

मामला अब केवल मकान विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। SP के आदेश और FIR में नामों की संख्या को लेकर उठे सवाल ने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की दोबारा जांच और शेष चार लोगों को भी विवेचना में शामिल करने की मांग की है।

अब पुलिस प्रशासन की जांच और अगली कार्रवाई से ही साफ होगा कि आठ नामों वाले आदेश के बाद FIR में चार नाम ही क्यों दर्ज हुए और बाकी चार नामों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

नोट: समाचार में आरोप शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित किए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का बयान मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।

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