बिजनौर के 200 स्कूल-कॉलेज होंगे ‘सेफ्टी जोन’! सितंबर से शुरू होगा मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम फेज-3, मॉक ड्रिल से तैयार होंगे विद्यार्थी
आपदा आई तो क्या करें? अब स्कूल-कॉलेजों में मिलेगा प्रैक्टिकल प्रशिक्षण, 300-500 छात्रों की भागीदारी वाला मेगा स्कूल सेफ्टी कार्यक्रम भी होगा आयोजित
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर, 07 अगस्त।
स्कूल की घंटी अब सिर्फ पढ़ाई का संकेत नहीं होगी, बल्कि आपदा से निपटने की तैयारी का भी संदेश देगी। भूकंप, आग, बाढ़, आकाशीय बिजली अथवा किसी अन्य आपदा की स्थिति में विद्यार्थी और शिक्षक घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकें—इसी उद्देश्य से बिजनौर में मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (फेज-3) को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है।
शासन की ओर से जारी विस्तृत कार्ययोजना के तहत जिले के करीब 200 विद्यालयों एवं महाविद्यालयों को अभियान से जोड़ा जाएगा। खास बात यह होगी कि प्रशिक्षण केवल कागजी जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मॉक ड्रिल और व्यवहारिक अभ्यास को प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।
200 शिक्षण संस्थानों का होगा चयन
विकास भवन सभागार में आयोजित बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि जनपद स्तर पर गठित कार्यकारी समिति मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम की पूरी कार्ययोजना तैयार करेगी।
योजना के तहत करीब 200 शिक्षण संस्थानों का चयन प्रस्तावित है। इनमें—
- 100 विद्यालय माध्यमिक शिक्षा विभाग के
- 60 निजी विद्यालय
- 40 सरकारी एवं गैर-सरकारी महाविद्यालय
शामिल होंगे।
इस चयन का उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के शिक्षण संस्थानों तक आपदा प्रबंधन और सुरक्षा प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित करना है।
सिर्फ भाषण नहीं, मौके पर होगी मॉक ड्रिल
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण होगा। विद्यार्थियों और शिक्षकों को आपदा प्रबंधन के सैद्धांतिक पहलुओं की जानकारी देने के साथ वास्तविक परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया जाएगा।
प्रशिक्षण में मॉक ड्रिल, सुरक्षित निकासी, आपात स्थिति में प्रतिक्रिया और सुरक्षा संबंधी व्यवहारिक गतिविधियों पर विशेष जोर रहेगा।
इसके लिए आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनरों की टीमें गठित की जाएंगी।
विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी होंगे प्रशिक्षण का हिस्सा
स्कूल सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रखी जाएगी। प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
यानी आपदा की स्थिति में शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सुरक्षित निकालने और प्राथमिक प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भी तैयार किए जाएंगे।
300 से 500 विद्यार्थियों वाला मेगा स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम
जिले में एक मेगा स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें लगभग 300 से 500 विद्यार्थियों की सहभागिता होगी।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि स्कूल सुरक्षा को लेकर व्यापक जनजागरूकता पैदा करना भी है। इसमें जनप्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता के माध्यम से सुरक्षा संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की योजना है।
डिजिटल पोस्टर, वीडियो और बुकलेट से होगा जागरूकता अभियान
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से प्रशिक्षण के लिए पोस्टर, बुकलेट, वीडियो और अन्य आईईसी सामग्री डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके साथ ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थानीय परिस्थितियों और जिले में संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त जागरूकता सामग्री का इस्तेमाल कर सकेगा।
इसका मतलब साफ है कि प्रशिक्षण को केवल सामान्य आपदा प्रबंधन तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय जोखिमों के अनुरूप भी तैयार किया जा सकेगा।
हर प्रशिक्षण कार्यक्रम की होगी रिकॉर्डिंग
कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी सुरक्षित रखी जाएगी।
रिकॉर्डिंग में विशेष रूप से आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवहारिक गतिविधियों और मॉक ड्रिल को प्रमुखता देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे प्रशिक्षण की वास्तविक स्थिति और गतिविधियों का दस्तावेजीकरण भी हो सकेगा।
सितंबर से नवंबर तक चलेगा अभियान
शासन के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (फेज-3) के तहत जिले में प्रशिक्षण कार्यक्रम सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जाएंगे।
तीन महीने तक चलने वाला यह अभियान विद्यार्थियों और शिक्षकों में आपदा से निपटने की क्षमता विकसित करने के साथ विद्यालयों में ‘सेफ्टी कल्चर’ को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विश्लेषण: असली परीक्षा मॉक ड्रिल की होगी
मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि कितने स्कूलों में प्रशिक्षण कराया गया। असली सवाल यह होगा कि प्रशिक्षण के बाद किसी आपात स्थिति में विद्यार्थी और शिक्षक कितनी तेजी और समझदारी से प्रतिक्रिया दे पाते हैं।
यदि मॉक ड्रिल वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप कराई जाती है, निकासी मार्गों की जानकारी विद्यार्थियों को दी जाती है और शिक्षक नियमित रूप से अभ्यास करते हैं, तो यह अभियान स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है।
बिजनौर जैसे जिले में बाढ़, जलभराव, आकाशीय बिजली, आग और अन्य स्थानीय आपदाओं के संभावित जोखिमों को देखते हुए स्कूल सुरक्षा को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नियमित सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाना ज्यादा प्रभावी होगा।
TargetTvLive की नजर में अब सबसे अहम सवाल यही है—क्या इन मॉक ड्रिल को महज औपचारिकता से आगे ले जाकर वास्तव में विद्यार्थियों की ‘आपदा से बचाव की क्षमता’ में बदला जा सकेगा?
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive











