CM Yogi Visit Bijnor: धनोरा-चांदपुर रोड पर रोके गए शिवसैनिक, तीन दर्जन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद गरमाई सियासत
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद भ्रमण के दौरान जनसमस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपने जा रहे शिवसेना पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने धनोरा-चांदपुर रोड पर रोककर हिरासत में ले लिया। इसके बाद शिवसैनिकों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन एसएसआई देशराज सिंह तोमर को सौंपकर सड़क निर्माण, डग्गामार बसों पर कार्रवाई, गौशालाओं में गोवंश के संरक्षण, भ्रष्टाचार पर रोक और मंडी समिति में करोड़ों रुपये मूल्य के पेड़ों की कथित अनियमित बिक्री की जांच की मांग उठाई।
यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान जनपद में राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियों का केंद्र बना रहा। शिवसेना ने इसे जनता की आवाज को दबाने का प्रयास बताया, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एहतियातन कार्रवाई की बात कही।
क्या हैं शिवसेना की प्रमुख मांगें?
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में शिवसेना ने पांच प्रमुख मांगें उठाई हैं—
- जेपी पब्लिक स्कूल से फादरसन स्कूल तक उखड़ी पड़ी सड़क का शीघ्र निर्माण कराया जाए।
- जनपद में संचालित डग्गामार बसों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
- गौशालाओं में गोवंश के साथ हो रहे कथित उत्पीड़न को बंद कराया जाए।
- बिजनौर में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।
- मंडी समिति में करोड़ों रुपये मूल्य के पेड़ों को कथित रूप से लाखों रुपये में बेचे जाने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
तीन दर्जन शिवसैनिक हिरासत में
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए प्रमुख शिवसेना नेताओं में जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह, जिला उप प्रमुख मुकेश लांबा, तहसील प्रमुख धर्मवीर सिंह, शोभित गुर्जर, संदीप बिल्ला, डॉ. दिनेश, पुलकित त्यागी, अरुण सैनी और भूदेव शर्मा सहित लगभग तीन दर्जन कार्यकर्ता शामिल रहे।
जनसमस्याओं पर राजनीति या जनहित की लड़ाई?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान विभिन्न संगठन अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में शिवसेना द्वारा उठाए गए मुद्दे सीधे तौर पर स्थानीय जनता से जुड़े हुए हैं। सड़क निर्माण, अवैध परिवहन और गौशालाओं की व्यवस्था जैसे विषय लंबे समय से जनचर्चा का विषय बने हुए हैं।
विशेष रूप से मंडी समिति में करोड़ों रुपये मूल्य के पेड़ों की कथित अनियमित बिक्री का मामला यदि तथ्यों के साथ सामने आता है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा विषय बन सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है।
लोकतांत्रिक अधिकार और प्रशासनिक जिम्मेदारी
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का अधिकार है, वहीं मुख्यमंत्री जैसे संवेदनशील कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।
प्रशासन का पक्ष
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद एसएसआई देशराज सिंह तोमर ने ज्ञापन को संबंधित स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। पुलिस प्रशासन की ओर से हिरासत में लिए जाने को सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया बताया गया।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री के दौरे के बीच शिवसेना द्वारा उठाए गए मुद्दों ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर शासन और प्रशासन किस प्रकार की कार्रवाई करता है।
(डिस्क्लेमर : समाचार में वर्णित आरोप एवं मांगें ज्ञापन में प्रस्तुत तथ्यों और शिवसेना नेताओं के बयानों पर आधारित हैं। संबंधित मामलों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच एवं आधिकारिक पुष्टि अपेक्षित है।)
रिपोर्ट : अवनीश त्यागी
Editor : TargetTvLive
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