अब ‘कागजी निस्तारण’ नहीं चलेगा! डीएम जसजीत कौर का सख्त एक्शन, खराब प्रदर्शन वाले अधिकारियों से मांगा जवाब

By Avnish Tyagi | TargetTvLive
बिजनौर, 30 जून। जनशिकायतों के निस्तारण में लगातार मिल रही शिकायतों और आईजीआरएस पर विभागों के प्रदर्शन को लेकर बिजनौर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी जसजीत कौर ने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल फाइलों में शिकायतें बंद करने का दौर नहीं चलेगा। शिकायतों का समाधान तभी माना जाएगा, जब शिकायतकर्ता वास्तविक रूप से संतुष्ट होगा।
बैठक में आईजीआरएस पोर्टल पर विभिन्न विभागों की लंबित, डिफॉल्टर और गुणवत्तापूर्ण शिकायतों की समीक्षा की गई। खराब प्रदर्शन करने वाले अधिशासी अधिकारियों, बीडीओ और एडीओ के खिलाफ जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई प्रशासन की उस नीति का संकेत है, जिसमें जवाबदेही और परिणाम दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है।
आईजीआरएस की रैंकिंग से ज्यादा ‘जनसंतुष्टि’ पर जोर
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिलाधिकारी ने अधिकारियों को केवल पोर्टल पर शिकायत बंद करने के बजाय शिकायतकर्ता से सीधे संवाद स्थापित करने और मौके पर जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागों की सफलता का पैमाना अब सिर्फ निस्तारित शिकायतों की संख्या नहीं, बल्कि संतोषजनक फीडबैक भी होगा।
प्रशासन का मानना है कि यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है, तो तकनीकी रूप से बंद की गई शिकायत भी व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी।
खराब प्रदर्शन पर सीधे जवाबदेही तय होगी
समीक्षा के दौरान स्पष्ट संदेश दिया गया कि आईजीआरएस मामलों में लापरवाही, शिथिलता या बिना जांच शिकायत बंद करने जैसी प्रवृत्तियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का तथ्यात्मक परीक्षण किया जाए और लंबित व डिफॉल्टर प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर निस्तारित किया जाए।
विशेष रूप से अधिशासी अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और एडीओ को अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए गए।
विश्लेषण: प्रशासन ने क्यों अपनाया सख्त रुख?
आईजीआरएस प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जनशिकायत प्रणाली है, जहां नागरिक सीधे अपनी समस्याएं दर्ज कराते हैं। पिछले कुछ समय से कई मामलों में केवल औपचारिक निस्तारण और शिकायतकर्ताओं की असंतुष्टि सामने आने के कारण शासन लगातार गुणवत्ता आधारित निस्तारण पर जोर दे रहा है।
बिजनौर में जिलाधिकारी की इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट संकेत मिला है कि अब अधिकारियों का मूल्यांकन केवल फाइलों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि जनता के फीडबैक और वास्तविक समाधान के आधार पर भी होगा। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे प्रशासन और आम नागरिकों के बीच भरोसा मजबूत हो सकता है।
बैठक में रणविजय सिंह, शरदपाल सिंह, डॉ. कौशलेंद्र सिंह, जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
TargetTvLive Analysis
यह समीक्षा बैठक केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अधिकारियों के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि अब जनशिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होगा। आने वाले दिनों में आईजीआरएस पर विभागों के प्रदर्शन में सुधार और फील्ड स्तर पर अधिक सक्रियता देखने को मिल सकती है।
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