बिजनौर में भूजल बचाने की बड़ी मुहिम: डीएम जसजीत कौर का सख्त संदेश, अवैध बोरिंग करने वालों पर होगी कार्रवाई
अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। आने वाले समय में पानी की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी खतरे को देखते हुए बिजनौर प्रशासन ने भूजल संरक्षण को लेकर कमर कस ली है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं और अवैध रूप से भूजल दोहन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित भूगर्भ जल अधिनियम-2019 की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में गिरता भूजल स्तर चिंता का विषय है। यदि अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जल संकट गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने सभी विभागों को जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए।
बारिश का पानी अब नहीं होगा बर्बाद
डीएम ने कहा कि वर्षा जल को सहेजना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए सभी सरकारी भवनों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बारिश के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके।
तालाब और पोखर बनेंगे भूजल बढ़ाने का आधार
बैठक में जिलाधिकारी ने जिले के तालाबों, पोखरों और जलाशयों को बचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन जल स्रोतों की नियमित सफाई कराई जाए और उन्हें पुनर्जीवित किया जाए। उनका कहना था कि पारंपरिक जल स्रोतों को संरक्षित किए बिना भूजल संकट का समाधान संभव नहीं है।
अवैध बोरिंग करने वालों पर प्रशासन की नजर
भूजल संरक्षण को लेकर प्रशासन अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध बोरिंग, बिना अनुमति भूजल दोहन और नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कानून का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
जल संरक्षण को बनाया जाएगा जन आंदोलन
डीएम जसजीत कौर ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से जल संकट नहीं टल सकता। इसके लिए आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को गांव-गांव और शहर-शहर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए, ताकि लोग पानी बचाने और वर्षा जल संचयन के महत्व को समझ सकें।
क्यों अहम है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार बिजनौर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। खेती, उद्योग और घरेलू जरूरतों के लिए बढ़ते भूजल दोहन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में जिला प्रशासन की यह पहल भविष्य में जल संकट को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जिलाधिकारी की इस बैठक से साफ संकेत मिला है कि अब बिजनौर में जल संरक्षण केवल कागजी योजना नहीं रहेगा, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ काम करेगा। यदि निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ तो आने वाले वर्षों में जिले के भूजल स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
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