बिजनौर में किसानों का हुंकार! भाकियू पंचायत में गूंजे बाढ़, गन्ना भुगतान और खाद संकट के मुद्दे, डीएम को सौंपा 7 सूत्रीय ज्ञापन
“समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन” — भाकियू
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी| TargetTvLive
बिजनौर। गन्ना समिति बिजनौर में सोमवार को आयोजित भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की मासिक पंचायत किसानों की समस्याओं को लेकर एक मजबूत आवाज बनकर सामने आई। पंचायत में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने अपनी परेशानियों को खुलकर रखा और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की। पंचायत की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान ने की, जबकि संचालन मुख्य महासचिव मुकेश झिंगला ने किया।
पंचायत के बाद जिलाधिकारी बिजनौर के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए किसानों ने साफ कहा कि यदि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।
बाढ़ से पहले सुरक्षा इंतजाम की मांग
मानसून के मद्देनजर किसानों ने बलावाली, मंडावर, जलीलपुर और अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई। किसानों का कहना है कि हर साल बाढ़ से फसलें, घर और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होती है, इसलिए प्रशासन को पहले से तैयारी करनी चाहिए।
59 साल पुराना दर्द फिर आया सामने
पंचायत में वर्ष 1967 में पीली बांध निर्माण के दौरान भूमि गंवाने वाले किसानों का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। किसानों ने कहा कि कई परिवार आज भी अपनी जमीन के उचित प्रतिकार का इंतजार कर रहे हैं। भाकियू ने प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
खाद की किल्लत और गन्ना भुगतान बना बड़ा मुद्दा
किसानों ने सहकारी समितियों में यूरिया और डीएपी खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। वहीं बिलाई शुगर मिल पर बकाया गन्ना भुगतान का मामला भी पंचायत में प्रमुखता से छाया रहा। किसानों ने कहा कि समय पर भुगतान न मिलने से खेती और परिवार दोनों की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सड़क, पानी और तालाबों पर भी उठी आवाज
भाकियू ने बारूकी नहर पुल से सिकड़े नहर पुल तक पक्की सड़क निर्माण कराने की मांग की। साथ ही चंदानांगली (हल्दौर), भवानीपुर गगरन (जलीलपुर) सहित कई गांवों में बनी नई पानी की टंकियों से नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू कराने की मांग रखी गई।
हल्दौर के सुनारों वाले तालाब सहित कई तालाबों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर भी किसानों ने चिंता जताई और प्रशासन से अभियान चलाकर तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की।
भाकियू में बढ़ा किसानों का भरोसा
पंचायत के दौरान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और संगठनात्मक संदेश भी देखने को मिला। अन्य किसान संगठनों से जुड़े कई किसानों ने भारतीय किसान यूनियन की सदस्यता ग्रहण की। रविंदर राठी, राजीव चौधरी, रोहित राठी सहित कई किसानों ने भाकियू का दामन थामा। संगठन पदाधिकारियों ने इसे किसानों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया।
किसानों की एकजुटता का बड़ा संदेश
इस पंचायत ने साफ कर दिया कि किसान अब अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर और अधिक संगठित हो रहे हैं। बाढ़ सुरक्षा, गन्ना भुगतान, खाद उपलब्धता, सड़क निर्माण और पेयजल जैसी समस्याएं सीधे ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर प्रशासन की कार्रवाई किसानों की निगाहों में सबसे बड़ा सवाल बनी रहेगी।
पंचायत में सत्यवीर सिंह (सोनू चौधरी), विजयपाल सिंह, मनप्रीत संधू, सोनू विरक, महेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, नरदेव सिंह, गौरव झिंगला, अजय बालियान, आशु चौधरी, डॉ. विजय सिंह, संदीप त्यागी, सूर्या बालियान, आकाश चौधरी, रजनीश अहलावत, वीरेश राणा, सत्यम तोमर, जयप्रकाश राजपूत, शाहनवाज सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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