“बिजनौर में अब नहीं चलेगी लापरवाही! हर महीने होगी अफसरों की क्लास, सीडीओ ने जारी किया सख्त कैलेंडर”
सीडीओ ने जारी किया मासिक समीक्षा कैलेंडर, अब विकास योजनाओं की सुस्ती और लापरवाही पर लगेगी लगाम
अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। सरकारी योजनाओं की धीमी प्रगति, विभागों के बीच समन्वय की कमी और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए बिजनौर प्रशासन ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब जिले में संचालित सभी प्रमुख विकास योजनाओं और विभागीय कार्यक्रमों की नियमित, समयबद्ध और विभागवार समीक्षा की जाएगी। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बिजनौर द्वारा विस्तृत बैठक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत हर महीने अलग-अलग विभागों की बैठकें निर्धारित तिथि पर आयोजित होंगी, जिनमें अधिकारियों को अपनी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। समीक्षा केवल कागजी रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सीएम डैशबोर्ड और शासन द्वारा निर्धारित प्रारूपों के आधार पर वास्तविक प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा।
प्रशासनिक हलकों में इस कदम को विकास कार्यों की निगरानी को मजबूत बनाने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
अब नहीं चलेगी बहानेबाजी, हर विभाग के लिए तय किए गए नोडल अधिकारी
मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी बैठक सूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक विभागीय समूह के लिए एक नोडल अधिकारी नामित किया गया है। यह अधिकारी बैठक की तैयारी, प्रगति पुस्तिका तैयार कराने, संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने और बैठक के बाद कार्यवृत्त जारी करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि समीक्षा बैठकों में केवल आंकड़ों की प्रस्तुति न हो, बल्कि योजनाओं की जमीनी स्थिति का भी आकलन किया जा सके।
ग्राम पंचायत से लेकर उद्योग और बिजली तक, हर क्षेत्र रहेगा निगरानी के दायरे में
जारी कार्यक्रम के अनुसार जिले के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों को समीक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है।
इनमें प्रमुख रूप से—
✔ ग्राम्य विकास एवं पंचायत राज विभाग
✔ मनरेगा एवं स्वरोजगार योजनाएं
✔ कृषि, उद्यान, पशुपालन और मत्स्य विभाग
✔ स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण विभाग
✔ बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग
✔ उद्योग, सेवायोजन और खादी ग्रामोद्योग विभाग
✔ सिंचाई, विद्युत, नलकूप एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग
✔ समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग
शामिल हैं।
यानी गांव की सड़क से लेकर रोजगार, किसानों की योजनाओं से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा से लेकर बिजली-पानी तक, हर क्षेत्र की प्रगति पर प्रशासन की पैनी नजर रहेगी।
हर सप्ताह विकास भवन में जुटेंगे अधिकारी
जारी कार्यक्रम के अनुसार अधिकांश बैठकें विकास भवन सभागार में अपराह्न 3 बजे आयोजित की जाएंगी।
प्रत्येक माह के—
- प्रथम सोमवार को ग्राम्य विकास एवं पंचायत राज विभाग,
- प्रथम बृहस्पतिवार को कृषि एवं संबद्ध विभाग,
- द्वितीय सोमवार को स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण,
- द्वितीय बृहस्पतिवार को शिक्षा विभाग,
- तृतीय सोमवार को उद्योग एवं सेवायोजन,
- तृतीय बृहस्पतिवार को सिंचाई और विद्युत विभाग,
- चतुर्थ सोमवार को कार्यदायी संस्थाएं,
- चतुर्थ बृहस्पतिवार को समाज कल्याण और संबंधित विभागों
की समीक्षा होगी।
इससे पूरे महीने विकास कार्यों की निरंतर निगरानी बनी रहेगी।
सीएम डैशबोर्ड पर परखी जाएगी जमीनी हकीकत
प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सीएम डैशबोर्ड आज सरकारी योजनाओं की प्रगति मापने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
ऐसे में अधिकारियों को केवल रिपोर्ट प्रस्तुत करने से काम नहीं चलेगा। उन्हें यह भी बताना होगा कि योजनाओं का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंच रहा है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार कई विभागों में लंबित परियोजनाओं, अधूरे निर्माण कार्यों और लक्ष्य पूर्ति में देरी जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस किया जा सकता है।
अवकाश होने पर भी नहीं रुकेगी समीक्षा प्रक्रिया
बैठक कार्यक्रम में एक विशेष व्यवस्था भी की गई है।
यदि किसी निर्धारित सोमवार या बृहस्पतिवार को सार्वजनिक अवकाश, शासन स्तर का कार्यक्रम अथवा अन्य महत्वपूर्ण कारण से बैठक नहीं हो पाती है, तो उसे उसी सप्ताह क्रमशः बुधवार अथवा शनिवार को आयोजित किया जाएगा।
इस व्यवस्था से यह स्पष्ट संदेश गया है कि विकास कार्यों की समीक्षा अब किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी।
जनता को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित समीक्षा बैठकों से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
इसके प्रमुख लाभ हो सकते हैं—
- लंबित परियोजनाओं को गति मिलेगी।
- विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
- सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी से पहुंचेगा।
- निर्माण एवं विकास कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
- शिकायतों और समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश—परिणाम चाहिए, बहाने नहीं
मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से जारी निर्देशों को प्रशासनिक सख्ती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरी तैयारी के साथ बैठक में शामिल हों और योजनाओं की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत करें। इससे यह भी माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों और विभागों पर प्रशासन की नजर और अधिक सख्त हो सकती है।
TargetTvLive विश्लेषण
बिजनौर में विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा का यह नया ढांचा केवल औपचारिक बैठक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की एक संगठित पहल है। यदि बैठकों में लिए गए निर्णयों का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो जिले में विकास परियोजनाओं की गति बढ़ने के साथ-साथ आम जनता को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
सरल शब्दों में कहें तो अब बिजनौर में विकास कार्यों की फाइलें सिर्फ दफ्तरों में नहीं चलेंगी, बल्कि उनकी प्रगति पर हर महीने सख्ती से नजर रखी जाएगी।
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