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पुण्यतिथि विशेष: किसानों के मसीहा राजेश पायलट का अमरोहा से था खास रिश्ता, जानिए पूरी कहानी

राजेश पायलट: किसानों, गांवों और आंचलिक पत्रकारिता की आवाज, अमरोहा आज करता है गर्व से याद

विशेष रिपोर्ट:  TargetTvLive

अमरोहा। भारतीय राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय बीतने के बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा रहते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और किसानों के लोकप्रिय नेता स्वर्गीय राजेश पायलट ऐसा ही एक नाम हैं। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। अमरोहा में भी लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष, सादगी और जनसेवा को याद किया।

राजेश पायलट का मानना था कि देश की असली ताकत गांवों में बसती है। उनका कहना था कि यदि किसान खुशहाल होगा, मजदूर मजबूत होगा और गांव विकसित होंगे, तभी भारत वास्तव में विकसित राष्ट्र बन सकेगा। यही वजह थी कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में किसानों, गरीबों और आम लोगों की आवाज को मजबूती से उठाया।

जब राजेश पायलट ने आंचलिक पत्रकारिता को बताया लोकतंत्र की जड़

मंडी धनौरा में आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने राजेश पायलट से जुड़ी कई यादें साझा कीं। विश्व हिंदी संवाद केंद्र के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. बी.एस. जिंदल ने बताया कि वर्षों पहले गजरौला स्थित हाईवे मोटल में आयोजित एक बड़े आंचलिक पत्रकार सम्मेलन में राजेश पायलट ने पत्रकारिता को लेकर ऐसी बात कही थी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

उन्होंने कहा था कि “आंचलिक पत्रकारिता की उपेक्षा करना ऐसा है जैसे किसी पेड़ की शाखाओं को सींचना और उसकी जड़ों को सूखने के लिए छोड़ देना।”

उनका मानना था कि गांव-देहात में काम करने वाले पत्रकार ही समाज की असली समस्याओं को सरकार तक पहुंचाते हैं। आज जब डिजिटल दौर में सूचनाओं की बाढ़ है, तब भी उनकी यह सोच लोकतंत्र की मजबूती का महत्वपूर्ण संदेश देती है।

ग्रामीण भारत की आवाज को हमेशा दी ताकत

राजेश पायलट उन नेताओं में थे जो केवल भाषण नहीं देते थे, बल्कि गांवों की धूल भरी पगडंडियों पर चलकर लोगों की समस्याएं समझते थे। किसानों की फसल, मजदूरों की मेहनत और गरीबों की परेशानियां उनके राजनीतिक एजेंडे का केंद्र रहती थीं।

वह चाहते थे कि नीति निर्माण में केवल बड़े शहरों की नहीं, बल्कि गांवों और खेतों की आवाज भी बराबर सुनी जाए। यही कारण था कि किसान और ग्रामीण समाज उन्हें अपना सच्चा हितैषी मानते थे।

आम जनता की सुविधा के लिए लिए ऐतिहासिक फैसले

वक्ताओं ने बताया कि केंद्रीय परिवहन मंत्री रहते हुए राजेश पायलट ने कई ऐसे फैसले लिए जिनका लाभ सीधे आम लोगों को मिला। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों को उत्तर प्रदेश में संचालित करने की अनुमति देना उस समय एक बड़ा और जनहितकारी कदम माना गया था।

इस निर्णय से हजारों यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिली और दिल्ली-उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान हुआ।

अमरोहा से रहा आत्मीय रिश्ता

राजेश पायलट का अमरोहा और यहां के सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व से विशेष लगाव था। मंडी धनौरा में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के अनावरण जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी लोगों को आज भी याद है।

श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत दलित नेता डॉ. होरी सिंह के योगदान को भी याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक समरसता, जनसेवा और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए दोनों नेताओं का योगदान अविस्मरणीय है।

आज भी प्रेरणा देती है उनकी विरासत

राजेश पायलट का जीवन बताता है कि राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प भी है। किसानों के सम्मान, ग्रामीण विकास और लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के लिए उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।

उनकी पुण्यतिथि पर अमरोहा की जनता, सामाजिक संगठनों और पत्रकारिता जगत ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए संकल्प लिया कि गांव, किसान और आम जनता की आवाज को हमेशा मजबूती से उठाया जाएगा।

निष्कर्ष

राजेश पायलट केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि ग्रामीण भारत की उम्मीद, किसानों का विश्वास और लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने वाले दूरदर्शी व्यक्तित्व थे। उनकी सोच, उनके विचार और उनकी जनसेवा आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। अमरोहा की धरती से जुड़ी उनकी यादें आने वाली पीढ़ियों को हमेशा यह संदेश देती रहेंगी कि देश की असली ताकत गांवों और आम लोगों में बसती है।

रिपोर्ट: TargetTvLive :::

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