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रामप्रसाद बिस्मिल जयंती  काकोरी स्टेशन का नाम बिस्मिल के नाम पर रखने की उठी मांग, ब्राह्मण महासभा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रामप्रसाद बिस्मिल जयंती 

काकोरी स्टेशन का नाम बिस्मिल के नाम पर रखने की उठी मांग, ब्राह्मण महासभा ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

अवनीश त्यागी | TargetTvLive

मुरादाबाद। देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती पर मुरादाबाद में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा महानगर मुरादाबाद द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने बिस्मिल के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान को याद करते हुए उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महानायक बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के चित्र पर पुष्प अर्पित और माल्यार्पण के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्र के इस अमर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रभक्ति और बलिदान की मिसाल थे बिस्मिल

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं बल्कि उच्च कोटि के साहित्यकार, कवि और दूरदर्शी राष्ट्रनायक भी थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन भारत माता की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया। अंग्रेजी हुकूमत की दासता से देश को मुक्त कराने के लिए उन्होंने हर संघर्ष को स्वीकार किया और अंततः हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया।

वक्ताओं ने कहा कि आज जब देश स्वतंत्रता के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है, तब नई पीढ़ी को बिस्मिल जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और विचारों से परिचित कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

काकोरी कांड ने हिला दी थी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव

सभा में काकोरी कांड का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वर्ष 1925 में हुए इस ऐतिहासिक घटनाक्रम ने ब्रिटिश शासन की जड़ों को हिलाकर रख दिया था। बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाने को कब्जे में लेकर उस धन का उपयोग स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करने और क्रांतिकारी गतिविधियों के संचालन के लिए किया था।

इस घटना के बाद अंग्रेज सरकार ने बिस्मिल और उनके साथियों को गिरफ्तार कर कठोर दंड दिया, लेकिन वे अंतिम क्षण तक अपने राष्ट्रवादी विचारों पर अडिग रहे। उनका बलिदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

‘सरफरोशी की तमन्ना’ आज भी जगाती है देशभक्ति

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बिस्मिल की अमर पंक्तियों—

“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है।”

का स्मरण करते हुए कहा कि यह केवल कविता नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। आज भी ये पंक्तियां युवाओं के भीतर राष्ट्रभक्ति, साहस और त्याग की भावना का संचार करती हैं।

काकोरी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग

श्रद्धांजलि सभा के दौरान अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने उत्तर प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार से मांग की कि काकोरी रेलवे स्टेशन का नाम अमर क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर रखा जाए। उनका कहना था कि इससे आने वाली पीढ़ियां देश के इस महान सपूत के योगदान को बेहतर ढंग से जान सकेंगी और उनसे प्रेरणा ले सकेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को सार्वजनिक संस्थानों और ऐतिहासिक स्थलों के माध्यम से सम्मानित करना राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

बड़ी बात

बिस्मिल जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों को उचित सम्मान देने की बहस को भी नई ऊर्जा दी है। काकोरी स्टेशन के नामकरण की मांग आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का विषय बन सकती है।

कार्यक्रम में रहे उपस्थित

कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप शर्मा, अनिल कुमार शर्मा, विमलेंद्र विमल, राम प्रकाश शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, अमित शर्मा, राजू शर्मा, सुधांशु कौशिक, विवेक पांडेय, प्रवीण शर्मा, अभिषेक चतुर्वेदी, शुभ शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य विप्रबंधु उपस्थित रहे।


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