किसानों के लिए जरूरी खबर: बिजनौर में कितना है यूरिया-डीएपी का स्टॉक? कृषि विभाग ने जारी किए ताजा आंकड़े
खरीफ सीजन में उर्वरकों की कमी का डर खत्म, हजारों टन नया स्टॉक पहुंचा; किसानों से की गई खास अपील
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसानों के बीच चल रही चिंताओं पर जिला प्रशासन ने राहत भरी खबर दी है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनपद में यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आने वाले दिनों में हजारों टन अतिरिक्त उर्वरक भी पहुंचने वाले हैं। प्रशासन ने किसानों से अफवाहों से बचने और जरूरत के अनुसार ही उर्वरक खरीदने की अपील की है।
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इस समय गन्ने की फसल में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। किसानों की बढ़ती मांग को देखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जिले में कितना उर्वरक मौजूद है?
कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 10 जून 2026 तक बिजनौर में—
🔹 यूरिया – 12,348 मीट्रिक टन
🔹 डीएपी – 3,706 मीट्रिक टन
🔹 एनपीके – 1,337 मीट्रिक टन
उपलब्ध है।
इतना ही नहीं, 10 जून को जिले में 2,680 मीट्रिक टन यूरिया की नई खेप भी पहुंच चुकी है। वहीं अगले एक-दो दिनों में 2,646 मीट्रिक टन डीएपी आने की संभावना है। इससे साफ है कि फिलहाल किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
किसानों के लिए राहत, प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
जिला प्रशासन का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त स्टॉक भी मंगाया जाएगा ताकि किसी भी किसान को परेशानी न हो।
धान, गन्ना, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और देखभाल के समय उर्वरकों की मांग बढ़ती है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने पहले से ही पर्याप्त तैयारी कर ली है।
उर्वरक वितरण को लेकर लागू किए गए नियम
उर्वरकों का लाभ सभी किसानों तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासन ने वितरण की एक सीमा तय की है।
प्रति हेक्टेयर मिलेगा:
अधिकतम 7 बैग यूरिया
अधिकतम 5 बैग डीएपी
हालांकि जिन किसानों के पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है, उन्हें उनकी खेती और आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
ज्यादा यूरिया डालना फसल के लिए नुकसानदायक
कृषि विभाग ने किसानों को एक महत्वपूर्ण सलाह भी दी है। विभाग का कहना है कि कई किसान अधिक उत्पादन की उम्मीद में जरूरत से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन इससे फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक यूरिया के प्रयोग से—
- फसल में रोग बढ़ सकते हैं।
- कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है।
- पौधों की वृद्धि असंतुलित हो सकती है।
- उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
- मिट्टी की सेहत खराब हो सकती है।
इसलिए किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और निर्धारित मानकों के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए।
कालाबाजारी और जबरन टैगिंग पर सख्त चेतावनी
कृषि विभाग ने उर्वरक विक्रेताओं और केंद्र प्रभारियों को भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि उर्वरकों की बिक्री केवल निर्धारित सरकारी दरों पर की जाए।
इन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक
❌ उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद खरीदने की जबरदस्ती
❌ अधिक कीमत वसूलना
❌ जमाखोरी
❌ कालाबाजारी
❌ गैर-कृषि कार्यों में उर्वरकों का इस्तेमाल
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इन गतिविधियों में शामिल पाई गई तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किसानों के लिए सबसे जरूरी संदेश
कृषि विभाग का कहना है कि जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। किसान किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और केवल अधिकृत केंद्रों से ही उर्वरक खरीदें। यदि कहीं कालाबाजारी, जमाखोरी या जबरन टैगिंग की शिकायत मिले तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को जानकारी दें।
TargetTvLive विश्लेषण
बिजनौर में उर्वरकों का मौजूदा स्टॉक और लगातार पहुंच रही नई खेप यह संकेत देती है कि प्रशासन इस बार खरीफ सीजन को लेकर पूरी तरह तैयार है। यदि वितरण व्यवस्था पारदर्शी रही और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण बना रहा, तो किसानों को उर्वरक संकट जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं किसानों द्वारा संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत को भी नियंत्रित रखने में मदद करेगा।
— अवनीश त्यागी
Editor, TargetTvLive
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