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“सुहागरात मनाने नहीं आते…”: आशा बहनों का फूटा गुस्सा, बिजनौर स्वास्थ्य विभाग में अभद्रता के आरोपों से मचा बवाल

“सुहागरात मनाने नहीं आते…”: आशा बहनों का फूटा गुस्सा, बिजनौर स्वास्थ्य विभाग में अभद्रता के आरोपों से मचा बवाल

स्थानांतरण के बाद भी नहीं छोड़ा पद, महिला कर्मियों के अपमान और नसबंदी कैंप में अव्यवस्थाओं के आरोप; डीएम से लगाई न्याय की गुहार
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। जनपद के स्वास्थ्य विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन ने जिलाधिकारी को एक तीखा शिकायत पत्र भेजकर कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। महिला आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनके साथ न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, बल्कि कार्यस्थल पर ऐसा माहौल बनाया गया जिससे उनका सम्मान और आत्मसम्मान दोनों आहत हुए।

यह मामला अब केवल एक शिकायत भर नहीं रह गया है, बल्कि महिला सम्मान, सरकारी कार्य संस्कृति और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।

“हम सेवा करने आते हैं, अपमान सहने नहीं”

शिकायत पत्र में आशा बहनों का दर्द साफ झलकता है। उनका कहना है कि वे गांव-गांव जाकर सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करती हैं, लेकिन बदले में उन्हें सम्मान की जगह अपमान और मानसिक प्रताड़ना मिलती है।

आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों द्वारा उनके लिए आपत्तिजनक और शर्मनाक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इससे महिला कर्मियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि ऐसे व्यवहार से न केवल उनका मनोबल टूटता है बल्कि पूरे कार्य वातावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

स्थानांतरण के बावजूद बना रहा प्रभाव, उठे सवाल

विवाद को और हवा उस दस्तावेज ने दी है जिसमें संबंधित चिकित्सा अधिकारी के स्थानांतरण का आदेश जारी होने की पुष्टि होती है। आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्थानांतरण के बाद भी अधिकारी का प्रभाव समाप्त नहीं हुआ और पुरानी व्यवस्था पर उनका हस्तक्षेप बना रहा।

यही कारण है कि अब यह मामला केवल व्यक्तिगत शिकायत न रहकर प्रशासनिक अनुशासन का मुद्दा भी बन गया है।

नसबंदी कैंप की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल

ज्ञापन में नसबंदी शिविरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शिविर के दौरान व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं थीं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार नियोजन जैसे संवेदनशील कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे जनता के विश्वास को प्रभावित करती है।

महिला सम्मान का मुद्दा बना आंदोलन की वजह

आशा बहनों ने अपने पत्र में साफ कहा है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

महिला कर्मियों का कहना है कि अगर कार्यस्थल पर महिलाओं का सम्मान सुरक्षित नहीं रहेगा तो सरकारी योजनाओं को जमीन पर सफल बनाना मुश्किल होगा।

स्वास्थ्य विभाग की छवि पर लगा सवालिया निशान

बिजनौर में सामने आया यह विवाद ऐसे समय में चर्चा का विषय बना है जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मजबूत करने का दावा कर रही है। ऐसे में जमीनी स्तर पर काम कर रही आशा बहनों द्वारा लगाए गए आरोप विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

जनता के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर यदि स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ता ही खुद को असुरक्षित और अपमानित महसूस कर रही हैं तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना पड़ सकता है।

अब प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें

शिकायत पत्र सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि आरोपों की जांच किस स्तर पर होगी और क्या वास्तव में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या मामला सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाएगा।

एक बात तय है कि इस शिकायत ने बिजनौर के स्वास्थ्य महकमे में चल रही अंदरूनी नाराजगी को सार्वजनिक मंच पर ला दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा में रह सकता है।

TargetTvLive Special Note

यह समाचार आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए शिकायत पत्र तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। पत्र में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता पक्ष के हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों या स्वास्थ्य विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

नसबंदी कैंप से लेकर अभद्र व्यवहार तक, शिकायत पत्र ने खोली स्वास्थ्य विभाग की परतेंl

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