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“रक्षक ही बना भक्षक” : डॉक्टर पर गंभीर आरोप, आशा कार्यकर्ताओं ने बुलाया महाधरना

“अब और नहीं सहेंगे अपमान!” बिजनौर में आशा कार्यकर्ताओं का बड़ा ऐलान, डीएम कार्यालय पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

आशाओं ने खोला मोर्चा, सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर हजारों कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने अपने मान-सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में प्रसारित एक संदेश के माध्यम से 2 जून 2026 को सुबह 9 बजे बिजनौर स्थित जिला अधिकारी कार्यालय पर बड़े धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। इस आह्वान के बाद जिलेभर की आशा कार्यकर्ताओं में हलचल तेज हो गई है और बड़ी संख्या में महिलाओं के जुटने की संभावना जताई जा रही है।

सम्मान की लड़ाई या व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी?

आशा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रसारित संदेश में कहा गया है कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि आशाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए है। संदेश में दावा किया गया है कि एक चिकित्सक द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया था तथा नसबंदी शिविर के दौरान मारपीट जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए थे।

संदेश में यह भी कहा गया है कि संबंधित चिकित्सक का तबादला किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन यदि उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में अन्य स्थानों पर भी आशा कार्यकर्ताओं के साथ इसी प्रकार की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

“हम पहले महिला हैं, फिर आशा कार्यकर्ता”

आंदोलन के आह्वान में भावनात्मक अपील करते हुए कहा गया है कि आशा कार्यकर्ता बनने से पहले वे महिलाएं हैं और उनका सम्मान सर्वोपरि है। संदेश में महिला सम्मान और कार्यस्थल पर सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।

आशा संगठनों से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि किसी महिला कर्मी के साथ अभद्र व्यवहार या उत्पीड़न की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई आवश्यक है। यही कारण है कि यह मुद्दा अब केवल एक ब्लॉक या क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि जिलेभर की आशा कार्यकर्ताओं की एकजुटता का विषय बनता जा रहा है।

सभी ब्लॉकों से पहुंचने की अपील

धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए जिले के सभी विकास खंडों की आशा कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की गई है। संदेश में एकजुटता पर विशेष जोर देते हुए कहा गया है कि यदि समय रहते आवाज नहीं उठाई गई तो भविष्य में उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।

हालांकि सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेश में अनुपस्थित रहने वालों पर आर्थिक दंड लगाने जैसी बातों का भी उल्लेख किया गया है, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, जनजागरूकता अभियान और विभिन्न सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रहती है।

ऐसे में यदि बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल होती हैं तो कुछ स्वास्थ्य सेवाओं पर अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि आंदोलनकारी आशाओं का कहना है कि सम्मान और सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता।

प्रशासन की नजरें आंदोलन पर

धरना-प्रदर्शन की घोषणा के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं संबंधित चिकित्सक का पक्ष भी समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।

यदि आंदोलन में बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता शामिल होती हैं तो यह आने वाले दिनों में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

क्या कहता है कानून?

कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर देश में कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। किसी भी महिला कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार, उत्पीड़न या हिंसा की शिकायत की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई प्रशासनिक जिम्मेदारी मानी जाती है। ऐसे मामलों में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।

TargetTvLive की अपील

महिला सम्मान और सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यपरक कार्रवाई आवश्यक है। वहीं किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले सभी पक्षों की बात सामने आना भी लोकतांत्रिक और न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Disclaimer

यह समाचार सोशल मीडिया और आशा कार्यकर्ताओं के बीच प्रसारित आह्वान संदेश के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
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