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“फीस नहीं भरी तो बच्चे का अपमान!” — बिजनौर के निजी स्कूलों पर फूटा अभिभावकों का गुस्सा, डीएम से कार्रवाई की मांग

“फीस नहीं भरी तो बच्चे का अपमान!” — बिजनौर के निजी स्कूलों पर फूटा अभिभावकों का गुस्सा, डीएम से कार्रवाई की मांग

 

हर साल बढ़ती फीस, जबरन किताबें और बच्चों को प्रताड़ित करने के आरोप… बिजनौर में निजी स्कूलों के खिलाफ बड़ा मोर्चा

बिजनौर। जनपद के निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अब अभिभावकों का गुस्सा खुलकर सड़क पर आने लगा है। बढ़ती स्कूल फीस, अलग-अलग नामों से अवैध वसूली, जबरन किताबें खरीदवाने और फीस देरी होने पर बच्चों को प्रताड़ित किए जाने के आरोपों को लेकर बिजनौर अभिभावक संघ ने जिलाधिकारी को जापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल अब शिक्षा का मंदिर कम और “कमाई का बड़ा कारोबार” ज्यादा बनते जा रहे हैं। हर साल बिना किसी स्पष्ट नियम के फीस बढ़ा दी जाती है और अभिभावकों को मजबूरी में जेब ढीली करनी पड़ती है। हालत यह है कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं।

“फीस लेट हुई तो बच्चों को किया जाता है अपमानित”

जापन में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि समय पर फीस जमा न होने पर बच्चों को स्कूल में मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। अभिभावकों के मुताबिक कई स्कूलों में बच्चों को क्लास में टोकना, अलग बैठाना, परीक्षा रोकने की धमकी देना और सबके सामने अपमानित करना आम बात बन चुकी है।

इससे बच्चों के मनोबल पर गहरा असर पड़ रहा है और अभिभावकों में भय और गुस्सा दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

किताबों के नाम पर “लूट” का आरोप

अभिभावकों ने निजी स्कूलों के बुक सेंटर सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि अधिकांश स्कूलों ने अपने तय दुकानदार या निजी बुक सेंटर बना रखे हैं, जहां से ही किताबें और कॉपियां खरीदने का दबाव बनाया जाता है।

इतना ही नहीं—

  • किताबों के साथ अनावश्यक सामग्री जबरन थमा दी जाती है,
  • बाजार से किताब खरीदने पर कोर्स देने में आनाकानी की जाती है,
  • हर साल नया सिलेबस बताकर नई किताबें खरीदवाई जाती हैं,
  • जबकि अंदर का पाठ्यक्रम लगभग पुराना ही होता है।

अभिभावकों का कहना है कि यह पूरा खेल लाखों रुपये की कमाई के लिए चल रहा है।

“सरकारी आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित”

प्रदेश सरकार निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए कई बार दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई देती है। अभिभावकों का आरोप है कि प्रशासनिक ढिलाई के कारण स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं और नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।

डीएम से की गई ये बड़ी मांगें

बिजनौर अभिभावक संघ ने जिलाधिकारी से मांग की है कि—

  • निजी स्कूलों की फीस वृद्धि की जांच कराई जाए,
  • अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगे,
  • स्कूलों के बुक सेंटरों की जांच हो,
  • बच्चों के मानसिक उत्पीड़न पर कार्रवाई की जाए,
  • फीस निर्धारण के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू हो।

अब प्रशासन की परीक्षा

इस पूरे मामले ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाता है या फिर अभिभावकों की आवाज एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी।

रिपोर्ट : अवनीश त्यागी
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