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“संघर्ष से मिले अधिकार अब खतरे में…” बिजनौर में कर्मचारियों की बड़ी बैठक

“जिन हकों के लिए लड़ी गई लड़ाई, वही अब छीने जा रहे…”

बी.एन. सिंह की पुण्यतिथि पर गरजे कर्मचारी नेता, बोले—अब नहीं जागे तो खत्म हो जाएंगे कर्मचारियों के अधिकार

बिजनौर में भावुक श्रद्धांजलि सभा,पुरानी कर्मचारी एकता और संघर्षों को किया, याद

बिजनौर। कभी कर्मचारियों की आवाज़ पर सरकारें फैसले बदलने को मजबूर हो जाती थीं, लेकिन आज वही कर्मचारी अपने पुराने अधिकार बचाने की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। यह पीड़ा सोमवार को बिजनौर में आयोजित स्वर्गीय बी.एन. सिंह की 27वीं पुण्यतिथि सभा में खुलकर सामने आई।

पुराना महिला अस्पताल सिविल लाइन स्थित सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन कार्यालय में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने साफ कहा कि जिन सुविधाओं को वर्षों के संघर्ष से हासिल किया गया था, उन्हें अब धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। ऐसे में कर्मचारी संगठनों को फिर से एकजुट होकर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है।

बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष शिवध्यान सिंह ने की, जबकि संचालन जिला मंत्री योगेश्वर ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय बी.एन. सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि देने से हुई। सभा में मौजूद कर्मचारियों और पेंशनर्स ने दो मिनट मौन रखकर उन्हें याद किया।

“बी.एन. सिंह सिर्फ नेता नहीं, कर्मचारियों की ताकत थे”

सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष शिवध्यान सिंह ने कहा कि स्वर्गीय बी.एन. सिंह ने अपने जीवन का हर पल कर्मचारियों और शिक्षकों के अधिकारों के लिए संघर्ष में लगाया।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं दिलाना असंभव माना जाता था, लेकिन बी.एन. सिंह के नेतृत्व में आंदोलन खड़ा हुआ और कर्मचारियों को समान वेतनमान, महंगाई भत्ता और सेवा काल में दो प्रोन्नत वेतनमान जैसी बड़ी सुविधाएं मिलीं।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी शायद यह नहीं जानती कि इन सुविधाओं के पीछे वर्षों का संघर्ष, धरना और आंदोलन छिपा हुआ है।

विनियमितीकरण से लेकर मृतक आश्रित नौकरी तक दिलाए अधिकार

जिला मंत्री योगेश्वर ने कहा कि स्वर्गीय बी.एन. सिंह ने हजारों कर्मचारियों को विनियमितीकरण, स्थाईकरण और अवकाश नगदीकरण जैसी सुविधाएं दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

वहीं उपाध्यक्ष देशराज सिंह ने कहा कि मृतक आश्रितों को नौकरी दिलाने और कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के मनमाने तबादलों पर रोक लगाने जैसे फैसले भी कर्मचारियों की बड़ी जीत थे।

उन्होंने कहा कि उस दौर में कर्मचारी संगठन सिर्फ नाम के नहीं थे, बल्कि कर्मचारियों की ताकत बनकर खड़े रहते थे।

“सरकारें धीरे-धीरे खत्म कर रही पुरानी उपलब्धियां”

सभा में सबसे ज्यादा चर्चा जिला संरक्षक बलवीर सिंह के बयान की रही। उन्होंने कहा कि आज कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि पुराने संघर्षों से मिली सुविधाएं धीरे-धीरे खत्म की जा रही हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कर्मचारी और शिक्षक संगठन अब भी नहीं जागे, तो आने वाले समय में कर्मचारियों के अधिकार केवल फाइलों तक सीमित रह जाएंगे।

उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि सभी कर्मचारी संगठन निजी स्वार्थ छोड़कर एक मंच पर आएं और कर्मचारियों के भविष्य के लिए संयुक्त लड़ाई लड़ें।

बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारी और पेंशनर्स

कार्यक्रम में कामेश्वर नाथ त्यागी, रामपाल सिंह अहलावत, ओमवीर सिंह मलिक, टीकम सिंह, वीरेंद्र पाल सिंह, राजेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह, बीआर पाल, अजय कुमार, बिजेंद्र सिंह राठी, धीरज सिंह, क्रांति कुमार शर्मा, शूरवीर सिंह, मोहित त्यागी, कृष्ण कुमार, दीपक कुमार, जयप्रकाश पाल, संजय कुमार समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं पेंशनर्स मौजूद रहे।

कर्मचारियों के बीच फिर बढ़ रही आंदोलन की चर्चा

बिजनौर में आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसने कर्मचारियों के भीतर बढ़ती बेचैनी और भविष्य को लेकर चिंता को भी सामने ला दिया। वक्ताओं के तेवरों से साफ दिखा कि आने वाले समय में कर्मचारी संगठन फिर से बड़े आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।

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रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

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