WWF-India का ‘अमृत पानी मेगा इवेंट’: रसायन मुक्त खेती की ओर बढ़े नूरपुर के किसान, 30 प्रोडक्शन सेंटर बने नई उम्मीद

रिपोर्ट अवनीश त्यागी
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बिजनौर। बदलते दौर में खेती की बढ़ती लागत और घटती मिट्टी की उर्वरता किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे समय में नूरपुर ब्लॉक के ग्राम नंगली जाजू में आयोजित ‘अमृत पानी मेगा इवेंट’ किसानों के लिए नई दिशा और उम्मीद लेकर आया। WWF-India की पहल पर आयोजित इस मेगा कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती के ऐसे गुर सिखाए गए, जो कम लागत में बेहतर उत्पादन और स्वस्थ मिट्टी की गारंटी देते हैं।
प्राकृतिक खेती की ओर बड़ा कदम: रसायनों से दूरी, मुनाफे से दोस्ती
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार रसायनों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और मुनाफा कम हो रहा है।
कार्यक्रम में किसानों को विशेष रूप से इन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया—
- अमृत पानी बनाने और उपयोग की विधि
- जीवामृत और घन जीवामृत की वैज्ञानिक तैयारी
- प्राकृतिक खाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के तरीके
- कम लागत में अधिक उत्पादन के मॉडल
विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर सकती है।
मौके पर ही मिट्टी जांच, 30 प्रोडक्शन सेंटर बने
यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए ठोस कदम भी उठाए गए—
- ✔️ 20 किसानों के खेतों की मौके पर मिट्टी जांच की गई
- ✔️ पूरे गांव में 30 अमृत पानी प्रोडक्शन सेंटर स्थापित कराए गए
- ✔️ किसानों को उत्पादन से लेकर उपयोग तक की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई
यह पहल भविष्य में गांव को प्राकृतिक खेती का मॉडल गांव बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सैकड़ों किसानों की भागीदारी, अधिकारियों ने की सराहना
कार्यक्रम में नंगली जाजू, नंगली पथवारी, कासमपुर टांडा और मुबारकपुर नवादा सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।
इस दौरान उपस्थित प्रमुख लोगों में—
- ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान
- कृषि सहायक अमित कुमार
- ऑर्गेनिक एफपीओ के एमडी हितेश चौधरी
- WWF-India के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज कुमार
- कपिल सैनी
ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान ने WWF-India की पहल की सराहना करते हुए कहा—
“प्राकृतिक खेती ही भविष्य की खेती है। इससे किसानों की लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी।”
विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कार्यक्रम के कई दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं—
- ✔️ रासायनिक लागत में 50–70% तक कमी संभव
- ✔️ मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
- ✔️ उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि
- ✔️ किसानों की आय में बढ़ोतरी
अगर यह मॉडल सफल होता है, तो बिजनौर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को नई गति मिल सकती है।
भविष्य की खेती का नया मॉडल बन सकता है नूरपुर
नूरपुर में शुरू हुई यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि खेती में बदलाव की शुरुआत है। अमृत पानी और प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसान आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर प्रशासन और संस्थाओं का सहयोग इसी तरह मिलता रहा, तो आने वाले समय में बिजनौर प्राकृतिक खेती का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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