फर्जी NOC से मीट प्लांट तक मचा हड़कंप! अतीक अहमद पर दूसरा बड़ा केस, लोक संपत्ति अधिनियम में प्रशासन का करारा वार
बिजनौर | स्पेशल इन्वेस्टिगेशन डेस्क
बिजनौर में फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के सहारे मीट प्लांट संचालन का मामला अब प्रशासन बनाम माफिया नेटवर्क की शक्ल लेता जा रहा है। पहले धोखाधड़ी का मुकदमा, और अब लोक संपत्ति अधिनियम के तहत दर्ज दूसरा केस—अतीक अहमद के खिलाफ कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है।
मीट प्लांट की आड़ में बड़ा खेल?
सूत्रों के अनुसार, मीट प्लांट के संचालन के लिए जिस NOC को आधार बनाया गया था, वह प्रारंभिक जांच में फर्जी और भ्रामक पाया गया। जैसे ही यह तथ्य सामने आया, प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों से रिकॉर्ड तलब किए और पुलिस को केस दर्ज करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कागजी खेल और नियमों को ताक पर रखकर मीट प्लांट शुरू करने की कोशिश की गई, जो सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है।
एक के बाद एक मुकदमे, बढ़ी मुश्किलें
- पहले IPC की धाराओं में धोखाधड़ी का मुकदमा
- अब लोक संपत्ति अधिनियम के तहत दूसरा गंभीर केस
- मीट प्लांट से जुड़े लाइसेंस और अनुमतियों की पुनः समीक्षा
- राजस्व, प्रदूषण, नगर पालिका और पुलिस की संयुक्त जांच
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, लोक संपत्ति अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर भारी जुर्माना, संपत्ति जब्ती और कठोर सजा तक का प्रावधान है।
मीट प्लांट शुरू होते ही प्रशासन अलर्ट
मीट प्लांट की गतिविधियां शुरू होते ही स्थानीय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। दस्तावेजों की बारीकी से जांच में भूमि उपयोग, पर्यावरण स्वीकृति, नगर पालिका अनुमति और NOC से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल खड़े हुए हैं।
सूत्र बताते हैं कि अगर आगे की जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं, तो मीट प्लांट को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
अतीक अहमद की “कुंडली” खंगालने में जुटा प्रशासन
प्रशासन अब केवल इस एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। अतीक अहमद से जुड़े अन्य व्यवसाय, जमीन, पुराने लाइसेंस और सरकारी दस्तावेज भी जांच के दायरे में लाए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यदि अन्य मामलों में भी नियमों की अनदेखी या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो बड़ी और निर्णायक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
सख्त संदेश: कानून से ऊपर कोई नहीं
यह मामला बिजनौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक कड़ा संदेश है कि फर्जी दस्तावेजों और प्रशासनिक मिलीभगत के सहारे उद्योग चलाने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
जनता के बीच यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि—
क्या अब ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति लागू होगी?
क्यों अहम है यह केस?
- प्रशासनिक पारदर्शिता की कड़ी परीक्षा
- लोक संपत्ति की सुरक्षा का बड़ा मुद्दा
- अवैध उद्योगों पर लगाम लगाने की मिसाल
- आने वाले समय में अन्य जिलों में भी कार्रवाई का रास्ता
आगे क्या?
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में—
- और मुकदमे दर्ज हो सकते हैं
- आर्थिक जांच तेज होगी
- संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया शुरू हो सकती है
प्रशासन की हर कार्रवाई पर हमारी नज़र बनी हुई है।
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