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“रणविजय सिंह बने बिजनौर के नए सीडीओ: विवादों, सुधारों और उम्मीदों के बीच बदलती प्रशासनिक तस्वीर”

“रणविजय सिंह बने बिजनौर के नए सीडीओ: विवादों, सुधारों और उम्मीदों के बीच बदलती प्रशासनिक तस्वीर”

     पूर्व  CDO पूर्ण बोरा –                      CDO रणविजय सिंह

            बिजनौर।                            बिजनौर

बिजनौर। गाजियाबाद के एडीएम (प्रशासन) रहे रणविजय सिंह को बिजनौर का नया मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है। यह नियुक्ति उस दौर के बाद हुई है, जब पूर्व सीडीओ पूर्ण बोरा का कार्यकाल विवादों, अनुशासनहीनता और साथ ही कुछ उल्लेखनीय सामाजिक पहलों से गुजरा। अब नया अधिकारी न केवल विकास कार्यों को गति देने बल्कि प्रशासनिक छवि सुधारने की चुनौती के साथ जिले में प्रवेश कर रहा है।

🔹 पृष्ठभूमि: पूर्ण बोरा का विवादास्पद लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल

पूर्व सीडीओ पूर्ण बोरा का नाम बिजनौर प्रशासन में स्वेच्छाचारिता और विवादों के कारण चर्चा में रहा।

  • उनके कार्यकाल में कई कर्मचारियों और ठेकेदारों पर थप्पड़बाजी के आरोप लगे।
  • इसके विरोध में कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन तक किए, जिन्हें तत्कालीन डीएम उमेश मिश्रा के हस्तक्षेप और सीडीओ की ओर से माफी के बाद समाप्त किया गया।
  • इसके बाद भी नियम-विरुद्ध पोस्टिंग, ठेकेदारों को तरजीह और निर्देशों की अवहेलना जैसे आरोप बार-बार उठते रहे।

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है —

पूर्ण बोरा ने अपने कार्यकाल में कुछ असामान्य किन्तु सकारात्मक प्रयोग भी किए।

  • उन्होंने कई भ्रष्ट कर्मचारियों और ठेकेदारों को दंडित करने के लिए सामाजिक व सरकारी कार्यों में योगदान देने के लिए बाध्य किया।
  • उदाहरण के तौर पर, कुछ स्थानीय परियोजनाओं में उन्हीं लोगों से सामुदायिक भवनों की मरम्मत, सड़क-संवर्धन और सफाई कार्य करवाए गए, जो पहले भ्रष्टाचार में संदिग्ध माने जा रहे थे।
  • इसने एक ओर जहां “डर-से-सुधार” की मिसाल पेश की, वहीं दूसरी ओर उनके कठोर रवैये को लेकर आलोचना भी हुई।

इस प्रकार, पूर्ण बोरा का कार्यकाल विवादों और परिणामों दोनों का मिश्रण बन गया — एक ओर अनुशासनहीनता के आरोप, दूसरी ओर कुछ अनूठी सामाजिक पहलें।

🔹 रणविजय सिंह: उम्मीदों का नया चेहरा

अब शासन ने गाजियाबाद के एडीएम (प्रशासन) रणविजय सिंह को बिजनौर का नया मुख्य विकास अधिकारी नियुक्त किया है।

  • रणविजय सिंह अपने संयमित, संवादशील और परिणाम-उन्मुख कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं।
  • उन्हें बिजनौर भेजना शासन की “संतुलन बहाली” रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है — ताकि पिछले कार्यकाल में बनी नकारात्मक छवि को सुधारा जा सके।
  • शासन सूत्रों के अनुसार, सिंह को विशेष रूप से जिले की विकास योजनाओं में पारदर्शिता और गति लाने की जिम्मेदारी दी गई है।

🔹 बिजनौर की विकासीय प्राथमिकताएँ: नई दिशा की चुनौती

बिजनौर, जो एक कृषि-प्रधान और संसाधन-समृद्ध जिला है, अब एक नये संतुलित प्रशासन की अपेक्षा रखता है।
रणविजय सिंह के सामने मुख्य प्राथमिकताएँ होंगी:

  1. ✅ विभागीय मनोबल को बहाल करना — पिछले विवादों के बाद कर्मचारियों का विश्वास जीतना।
  2. ✅ विकास योजनाओं की पारदर्शिता — ठेकेदार-राज और आंतरिक पक्षपात की संस्कृति खत्म करना।
  3. ✅ सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना — पूर्ण बोरा के “सामाजिक दंड मॉडल” को अधिक संस्थागत रूप देना।
  4. ✅ वरिष्ठ अधिकारियों और जनता के बीच संवाद बढ़ाना — ताकि योजना और ज़मीन का अंतर कम हो।

🔹 विश्लेषण: शासन के संकेत और जिले की दिशा

  • योगी सरकार ने हाल ही में 40 से अधिक आईएएस अधिकारियों का तबादला किया है। यह दिखाता है कि शासन अब “क्लीन गवर्नेंस” और “फील्ड परफॉर्मेंस” पर ज्यादा जोर दे रहा है।
  • बिजनौर में रणविजय सिंह की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि शासन अब एक ऐसे अधिकारी को आगे लाना चाहता है जो नरमी और अनुशासन — दोनों के बीच संतुलन रख सके।
  • पूर्ण बोरा ने जहां कठोर प्रशासनिक नियंत्रण से व्यवस्था पर पकड़ बनाने की कोशिश की, वहीं रणविजय सिंह के सामने चुनौती होगी कि वे विश्वास, पारदर्शिता और रचनात्मकता के जरिए वही काम आगे बढ़ाएँ।

निष्कर्ष: बिजनौर की नई सुबह?

बिजनौर का विकास तंत्र अब दो युगों के मोड़ पर खड़ा है —
एक, जहाँ पूर्ण बोरा का विवादास्पद लेकिन सुधार-उन्मुख प्रयोगात्मक शासन पीछे छूट गया है,
और दूसरा, जहाँ रणविजय सिंह का संतुलित व पारदर्शी नेतृत्व उम्मीदों की नई राह खोल रहा है।

अगर रणविजय सिंह पूर्ण बोरा के सकारात्मक प्रयोगों को नीतिगत ढांचे में ढालकर पारदर्शिता और संवाद की संस्कृति ला सके,
तो बिजनौर न केवल प्रशासनिक रूप से सुधरेगा, बल्कि एक “रोल मॉडल डिस्ट्रिक्ट” के रूप में उभर सकता है — जहाँ कठोरता और करुणा, दोनों का संतुलन विकास की परिभाषा बदल देगा।

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