बोनस की जगह जबरन रिटायरमेंट!
दशहरे से पहले बिजली कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी, निजीकरण की साजिश का आरोप
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में त्योहारों से पहले बिजली कर्मियों और अभियंताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। जहां आमतौर पर विजयादशमी और दीपावली से पहले बोनस की घोषणा होती है, वहीं इस बार पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने जबरन सेवा निवृत्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इसे “निजीकरण के लिए उत्पीड़नात्मक नीति” करार दिया है।
संघर्ष समिति के गंभीर आरोप
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति का निर्देश दिया था, जिसे कर्मचारी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
- इसके बावजूद बोनस की जगह उन्हें रिटायरमेंट की चेतावनी दी जा रही है।
- अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंताओं की पूरी सूची जारी कर उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही की स्थिति मांगी गई है।
- समिति का कहना है कि यह प्रक्रिया “जबरन सेवा निवृत्ति” देने के लिए ही अपनाई गई है।
संघर्ष समिति संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा:
“बिजलीकर्मी लगातार जनता को बिना किसी असुविधा के बिजली आपूर्ति कर रहे हैं। इसके बदले उन्हें सम्मान और बोनस मिलना चाहिए था। लेकिन पावर कॉरपोरेशन निजी घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए कर्मियों का मनोबल तोड़ने में लगा है।”
क्या है पूरा मामला?
24 सितंबर को पावर कॉरपोरेशन ने एक पत्र जारी किया था जिसमें 27 सितंबर तक अभियंताओं के खिलाफ लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की रिपोर्ट मांगी गई थी।
- इस कदम से यह संकेत मिला कि प्रबंधन बड़ी संख्या में अधिकारियों को जबरन रिटायर करने की योजना बना रहा है।
- जबकि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंताओं की पदोन्नतियां पहले ही तय हो चुकी हैं।
संघर्ष समिति का दावा है कि शक्ति भवन के गलियारों से खबरें आ रही हैं कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को निजी हाथों में सौंपने से पहले बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी।
पहले से ही नाराज हैं बिजली कर्मी
यह पहली बार नहीं है जब पावर कॉरपोरेशन पर कर्मचारियों ने उत्पीड़न का आरोप लगाया हो। समिति के अनुसार:
- फेशियल अटेंडेंस विवाद के चलते हजारों कर्मियों का वेतन तीन माह से रुका है।
- संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर नौकरी से निकाला गया।
- नियमित कर्मियों का बड़े पैमाने पर दूर-दराज़ जिलों में तबादला कर दिया गया।
- अब जबरन रिटायरमेंट की तलवार लटकाई जा रही है।
आंदोलन का 307वां दिन
पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आंदोलन लगातार 307वें दिन भी जारी रहा।
- प्रदेश भर में कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
- आंदोलनकारी कहते हैं कि यह सिर्फ उनकी नौकरी बचाने की लड़ाई नहीं है बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली सेवाओं को बचाने का संघर्ष भी है।
- हालांकि समिति ने जनता को आश्वस्त किया है कि नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे पर्वों पर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी।
दशहरे के बाद होगा आंदोलन तेज
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि:
- दशहरे के बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
- इसके लिए पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
- अगर सरकार ने उत्पीड़नकारी नीतियां नहीं रोकीं तो आंदोलन राज्यव्यापी संकट का रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
त्योहारों के मौसम में बोनस की जगह जबरन रिटायरमेंट का खतरा बिजली कर्मचारियों में असंतोष फैला रहा है। निजीकरण की नीति और कर्मचारियों पर लगातार हो रहे दबाव से बिजली क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है।
अगर दशहरे के बाद आंदोलन तेज होता है, तो यह न केवल पावर कॉरपोरेशन बल्कि प्रदेश सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।













