ग्रीनबेल्ट में पातन अनुज्ञा घोटाला: तीन विभागों की मिलीभगत से बड़ा, खेल
उच्चाधिकारियों से बचने की तरकीब, दो-दो अनुज्ञा पत्र तैयार करने की तैयारी
ग्रीनबेल्ट में अनुज्ञा की आड़ में खेल: 73 की मांग, 150 से अधिक पर गदाबा
बिजनौर में पातन अनुज्ञा विवाद: कम दिखाए पेड़, ज्यादा पर छपान
अनुमोदन से बचने का ट्रिक: वानिकी विभाग का अनुज्ञा घोटाला उजागर
बाग में कुल पेड़ों की संख्या में बड़ा खेल
बिजनौर। ग्रीनबेल्ट क्षेत्र में आम के पेड़ों की पातन अनुज्ञा को लेकर सामाजिक वानिकी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों को ताक पर रखकर न केवल छः महीने पुरानी रिपोर्ट के आधार पर अनुज्ञा तैयार करने की तैयारी चल रही है, बल्कि एक ही खाता संख्या में वित्तीय वर्ष में दो-दो अनुज्ञा पत्र तैयार करने की साजिश भी सामने आई है। इस पूरे खेल में राजस्व और उद्यान विभाग की मिलीभगत भी उजागर हो रही है।
मामला क्या है?
- ग्रीनबेल्ट क्षेत्र के एक आम बाग में करीब 250 पेड़ खड़े हैं।
- विभागीय अधिकारियों द्वारा इनमें से 73 पेड़ों की पातन अनुज्ञा मांगी गई है।
- लेकिन मौके पर डेढ़ सौ से अधिक वृक्षों पर गदाबा (छपान) किया गया है।
- नियम स्पष्ट कहते हैं कि एक ही खाता संख्या पर वर्ष में केवल एक बार पातन अनुज्ञा जारी हो सकती है, लेकिन यहाँ एक ही वित्तीय वर्ष में दो-दो अनुज्ञा पत्र तैयार करने की तैयारी की जा रही है।
- छः महीने पुरानी रिपोर्ट को आधार बनाकर पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
- लगभग 25 सूखे पेड़ों की संख्या को रिपोर्ट में शामिल ही नहीं किया गया।
गड़बड़ी की परतें
- राजस्व विभाग की संदिग्ध भूमिका: भूमि और पेड़ों के रिकॉर्ड में हेरफेर कर पेड़ों की संख्या कम दर्शाई गई।
- उद्यान और सामाजिक वानिकी की फर्जी रिपोर्ट: मौके पर हकीकत देखने के बजाय गुमराह करने वाली रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई।
- सूखे पेड़ों की अनदेखी: लगभग 25 सूखे पेड़ों की रिपोर्टिंग या अनुमोदन की कोई तैयारी नहीं की गई।
- ईमानदार अधिकारी को गुमराह करना: इस पूरे खेल में एक ईमानदार अधिकारी को गलत जानकारी दी गई।
- अनुमोदन से बचने की तरकीब:
- नियम है कि 50 से अधिक पेड़ों की पातन अनुज्ञा तैयार करने के लिए उच्चाधिकारियों से अनुमोदन लेना अनिवार्य है।
- इसी कारण विभागीय अधिकारी एक ही खाता संख्या में दो अलग-अलग अनुज्ञा पत्र तैयार करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि वास्तविक संख्या छिपी रहे और उच्चाधिकारियों को भनक न लगे।
जिम्मेदार कौन?
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सामाजिक वानिकी विभाग के अधिकारी – जो अनुज्ञा पत्र तैयार करने की तैयारी में हैं।
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राजस्व लेखपाल व निरीक्षक – जिन्होंने रिकॉर्ड में हेरफेर किया।
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उद्यान विभाग – जिसने गलत आधार पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग किया।
बड़ा सवाल
क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या योजनाबद्ध भ्रष्टाचार का हिस्सा?
क्या उच्च अधिकारी इस मामले में निष्पक्ष जांच बैठाएंगे या यह प्रकरण भी कागजों में दबा दिया जाएगा?












