बिजनौर किसान पंचायत में बड़े आंदोलन के संकेत: दर्जनों कार्यकर्ता टिकैत गुट में शामिल
बिजनौर, 22 सितंबर 2025 – आज भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की मासिक पंचायत गन्ना समिति परिसर, बिजनौर में संपन्न हुई। जिला अध्यक्ष चौधरी सुनील प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में किसानों ने धान खरीद, मुआवजा, चारे की कमी और आदमखोर गुलदारों जैसी गंभीर समस्याओं पर जोर दिया।
किसानों की प्रमुख मांगें
- ✅ धान की खरीद तुरंत शुरू – सभी खरीद केन्द्रों पर तत्काल धान की खरीद।
- ✅ अतिवृष्टि और बाढ़ से नष्ट फसल का मुआवजा – प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत।
- ✅ चारे का संकट – शुगर मिलों को 15 अक्टूबर तक चालू किया जाए।
- ✅ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित – जिले की नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ा जाए।
- ✅ आदमखोर गुलदारों पर नियंत्रण – 40 से अधिक लोगों की जान ले चुके गुलदारों को दूरस्थ वनों में भेजा जाए।
- ✅ सड़कें और बुनियादी ढांचा – हर घर नल-हर घर जल योजना के तहत क्षतिग्रस्त गांवों की सड़कों की मरम्मत।
पंचायत में प्रमुख किसान
युवा जिला अध्यक्ष मनप्रीत सिंह सिंधु के नेतृत्व में रामावतार सिंह, लुधियान सिंह, उपमा चौहान, वीरेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, नरदेव सिंह, अमित कुमार, जय सिंह, आशु चौधरी, महावीर सिंह, शिव कुमार सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।
भाकियू कार्यकर्ता टिकैत गुट में शामिल
- भाकियू सामाजिक, नजीबाबाद क्षेत्र के नागेन्द्र सिंह राजा, रणधीर सिंह, सुमित कुमार, देव उर्फ पाटू सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने टिकैत गुट में आस्था जताई।
- भाकियू प्रधान के 40 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संगठन छोड़कर टिकैत में शामिल होकर नया सदस्यता लिया।
- नए सदस्यों का स्वागत जिला अध्यक्ष चौधरी सुनील प्रधान ने हरे गमछे पहनाकर किया।
जिला अध्यक्ष का संदेश
“किसानों की लड़ाई केवल एकजुट होकर ही लड़ी जा सकती है। हम शासन-प्रशासन से मांग करते हैं कि किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।” – चौधरी सुनील प्रधान
हाइलाइट्स
- 60+ कार्यकर्ता टिकैत गुट में शामिल।
- मुख्य मुद्दे: धान की खरीद, मुआवजा, चारे की कमी।
- जिले के जंगलों में मौजूद आदमखोर गुलदारों पर नियंत्रण।
- हर घर नल-हर घर जल योजना के तहत सड़कों की मरम्मत।
- पंचायत में शामिल किसानों ने आंदोलन तेज करने का संकेत दिया।
बिजनौर की यह पंचायत किसानों की एकजुटता और संगठन मजबूती का प्रतीक बनी। नए कार्यकर्ताओं का टिकैत गुट में शामिल होना सरकार पर दबाव बढ़ाने और किसानों की मांगों को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













